लोकतंत्र चार स्तंभों पर टिका है – न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया. लोकतंत्र को बचाए रखने में इन चारों ही स्तम्भों का योगदान है. परंतु बदलती परिस्थितियों में लोकतंत्र का
लोकतंत्र चार स्तंभों पर टिका है – न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया. लोकतंत्र को बचाए रखने में इन चारों ही स्तम्भों का योगदान है. परंतु बदलती परिस्थितियों में लोकतंत्र का
नये वर्ष की शुरुआत के साथ पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है. संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ही विष्णुपुर के तृणमूल कांग्रेस सांसद ने भारतीय जनता पार्टी
भारत में ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या के बराबर लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं. रेल इन यात्रों का एक अभिन्न हिस्सा है. रेल सेवाओं का जनमानस पर प्रभाव भी गहरा होता
नसीरूद्दीन शाह साहब अपने बच्चों के लिए डरे हुए हैं कि कहीं कल को भीड़ ने उन्हें घेर लिया और पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान तो क्या होगा?
नये साल के पहले ही दिन एक इन्टरव्यू के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने आम चुनावों के लिए खुली लड़ाई का एलान कर दिया है। अपने इस लम्बे इंटरव्यू में मोदी
बहुत पुरानी बात नही है. दिसम्बर, 2013 में मनमोहन सिंह की कैबिनेट ने साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा अधिनियम (Communal and Target Violence Bill) विधेयक पर मुहर लगाई थी. लेकिन फरवरी
2019 आम चुनाव का वर्ष है. वैसे तो हर चुनाव ही महत्वपूर्ण होते हैं पर यह चुनाव बहुत ही खास है. देखना दिलचस्प होगा कि 2014 मे मिली जीत को
समाज वोट देकर सत्ता बनाता है और हटाता है. 2019 एक बार फिर सरकार को दोबारा बनाने या हटाने के अधिकार का वर्ष है. सरकार से भी परे यह निर्णय
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुए हालिया चुनावों में सबका ध्यान मुख्यत: ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहा. राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने चुनावी लाभ के लिए बढ़-चढ़ कर
2014 का महाभारत युद्ध था. सेनाएं तैयार थी. धर्मराज युधिष्ठिर एक दशक पहले ही युद्ध का मैदान छोड़ चुके थे लेकिन उनके प्रिय शिष्य ने अभी तक गुजरात की गद्दी