लोकतंत के काहे कोसीं नेताजी के काहे खोबसीं सिस्टम के हम काहे भकोंसी जब हमहीं बनडमरु बानी हम तs सुतिया भोटर बानी ई हमके पकठाइल कहलन अउर ऊ मेहराइल कहलन
लोकतंत के काहे कोसीं नेताजी के काहे खोबसीं सिस्टम के हम काहे भकोंसी जब हमहीं बनडमरु बानी हम तs सुतिया भोटर बानी ई हमके पकठाइल कहलन अउर ऊ मेहराइल कहलन
अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी सभी इदारे मिले हुए है, जनरैल सारे खिले हुए हैं ख़ुशी दिखे इमरान तुम्हारी ऐसी-तैसी अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी मीडिया भांड के माफ़िक़ नाचें, जम्हूरियत के
फिर चुनाव सब, वही दाँव सब, कहीं हाथ तो, कहीं पाँव सब, इधर हवा तो, उधर है आँधी, इधर अमित शा, उधर हैं गांधी, है कालप्पा, औ येदुरप्पा, रक्षा करिए,
वर्षों तक रण में हार-हार, तजकर निज गरिमा बार-बार, युवराज पुनः तैयार हुआ, फिर नव-रण का आगार हुआ, सौभाग्य न सब दिन सोता है, जो रटे यही वह तोता है,
न हो कबाब तो आधा दो हो पास अगर तो ज़्यादा दो बस दे दो हमको दो सौ ग्राम रक्खो अपनी प्लेटें तमाम हम वही ख़ुशी से खायेंगे आगे न
पी एम वाइज़ डीमोनिटाइज ड़ू ऐक्सेप्ट इट गॉल ऐंड गाइज काला धन भारी मन थोड़ी पीड़ा ज़्यादा फन बात की धार बस धिक्कार लूट रही है ये सरकार पाँच सौ
मतलब सिद्ध उड़ते गिद्ध भांग घुली है तर्क निषिद्ध झूठ का नाच सच पर आँच जनपथ बाबा फिर से लॉंच ट्रोलम ट्रोल वही बवाल फ़ासीवाद बिकट अवसाद प्रेस्यागण करते आबाद
वाह दीवाली क्रैकर वाली खीर मिठाई लेकर आई बर्फ़ीखोरी भूल कैलोरी सजी रंगोली हँसी ठिठोली खील बताशा सुख की आशा धन की आस खेलाए ताश तीन ठो पत्ती गुल है
फ़ंडिंग बंद धंधा मंद पॉवर लॉस्ट वेरी फ़ास्ट बी सी सी आई जमी है काई न्यायालय है भारी भय है बैठा झाग दुखी अनुराग काँगरेस की उत प्रदेश की नेत्री
हुआ सर्जिकल मिला हमें बल भौंके नेता उन्हें नहीं कल सैनिक मरता रक्षा करता पर लीडर जो पॉकेट भरता जब भी बोले शबद न तोले राष्ट्र-वायु में बस विष घोले