टीवी समाचारों के उन्माद से आहत एक एंकर भयंकर बार बार आह्वान करते हैं कि टीवी मत देखिए. यह उनलोगों के लिए यह प्रयोज्य नहीं है जो पहले ही टीवी
टीवी समाचारों के उन्माद से आहत एक एंकर भयंकर बार बार आह्वान करते हैं कि टीवी मत देखिए. यह उनलोगों के लिए यह प्रयोज्य नहीं है जो पहले ही टीवी
सोवियत यूनियन के बिखराव के अनेक कारणों में से एक उसका ‘जंगी जुनून’ भी था. सोवियत यूनियन ने अपना रक्षा बजट इतना बढ़ा दिया था कि जनता की दैनिक दिनचर्या
महाभारत का एक प्रसंग है जहाँ पांडव कौरवों से संधि के लिए जाते हैं. वह कौरवों से मात्र पांच गांव की मांग करते हैं. वो कहते हैं कि चाहें दुर्योधन
सीमा पर तनाव है. बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से बमबारी जारी है, दो-तीन दिनों पहले उस बमबारी में नौ महीने के एक बच्चे की मौत हो गयी है. और
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर उतर आयीं हैं. सड़क पर महबूबा का यह आंदोलन राज्य के कट्टरपंथी संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर)’ पर लगाए गए
1993- मुम्बई 1998- कोयम्बटूर 2001- संसद हमला 2002- अक्षरधाम 2003/2006- मुम्बई ट्रेन 2005- दिल्ली 2006- वाराणसी 2007- समझौता एक्सप्रेस, हैदराबाद 2008- मुम्बई 26/11 2016- उरी 2019- पुलवामा ….. सैकड़ों और
राष्ट्र की सुरक्षा, अखंडता और अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए आवश्यक है धर्म. किन्तु यह धर्म हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई या अन्य नहीं होना चाहिए. यह धर्म सिर्फ और सिर्फ राष्ट्र धर्म होना
हिंदुस्तान की सामरिक शक्ति और राजनयिक सूझबूझ के सामने जिस तरह पाकिस्तान अकेला और कमजोर पड़ा है, उसी का नतीजा है कि उसने महज दो दिन में ही हमारे बहादुर
बालकोट हमले के बाद पकिस्तान की छटपटाहट जायज़ है. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान नकारता रहा था कि भारत ने कोई हमला नहीं किया है. इस बार के हमले