Category: विचार

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सजीव संविधान और 70 वर्षों का गणतंत्र

गणतांत्रिक व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ राज्य का प्रमुख वंशानुगत न होकर के राज्य के बीच का ही कोई निर्वाचित सदस्य होता है. भारत में गणतंत्र कोई आज की

तिरंगा यात्रा से दिक्कत क्यों?

देश में तिरंगा यात्राओं पर फिर बड़ी बहस छिड़ी हुई है. विडंबना देखिये कि जिस तिरंगे के मान की रक्षा के लिए देश का जवान सीमा पर प्राण न्योछावर कर

जब सइयां भये कोतवाल, तो फिर डर काहें का?

मज़ाक-मज़ाक में यह कहावत कहने वालों को क्या पता था कि एक दिन ऐसा आएगा जब इस कहावत पर गंभीरता से विचार किया जाने लगेगा. एक तरह से यह न्याय

लोपक प्रणाम, बालासाहेब!

6 दिसम्बर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढाँचे को कारसेवकों ने मिटा दिया. आरएसएस, भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के तमाम प्रवक्ताओं ने इसे एक सुनियोजित घटना मानने से इनकार

कश्मीरी पंड़ितों को एक संबोधन

हे पिंगल, पाणिनि, कल्हण और अभिनव गुप्त की संतानों, भरत, क्षेमेंद्र और आनंद वर्द्धन के वंशजों! विडम्बना है कि तुम्हारे पूर्वजों ने ही समूची दुनिया को पहली बार बताया था

PMGDISHA: आलसी विश्लेषण व सीमित सोच से गलत अवधारणा

देश में हर सरकार द्वारा कुछ न कुछ योजनाएं चलाई जाती रही हैं. देश की बढ़ती हुई जनसंख्या तक संसाधनों की पहुंच बनाने के लिए पिछली कई सरकारों में भी

उत्तर पूर्व की मातृवंशीय परम्परा

सवाल यह उठता है कि वो लोग कौन हैं जो भारत की सनातन परंपरा में स्त्रियों की कोई जगह न होने की बात करते हैं? उनके सतही ज्ञान को उत्तर-पूर्व के समूहों की जेनेटिक संरचना मुँह चिढ़ाती प्रतीत होती है.

सरनेम बदला या व्यक्तित्व?

विवाह के बाद दीपिका पादुकोण ने अपना नाम नहीं बदला लेकिन रणबीर सिंह रणबीर ‘पादुकोण’ होने को तैयार हो गए हैं. आधुनिक भारत की आधुनिक सोच का एक उदाहरण यह

हरियाणा को बदनाम करने की कोशिश क्यों?

हरियाणा सदैव से भारत की प्रगति के पहियों में रफ्तार देने का कार्य करता आया है. भारतीय सेना, खेल और राजनीति में हरियाणा का बोलबाला रहा है. हर क्षेत्र में