साध्वी प्रज्ञा को आज भाजपा से भोपाल का टिकट मिला है. कहने बताने को बहुत कुछ है लेकिन अभी सिर्फ एक मुद्दे पर बात करेंगे और वह है चुनावों में
साध्वी प्रज्ञा को आज भाजपा से भोपाल का टिकट मिला है. कहने बताने को बहुत कुछ है लेकिन अभी सिर्फ एक मुद्दे पर बात करेंगे और वह है चुनावों में
“छोड़ सियार भाई कुल्हड़ के आसा, तमासा बन जाइब, होइहे निरासा…” भोजपुरिया गीत है. मनोज तिवारी का गाया हुआ. लेकिन हम यहां इन गाने की बात क्यों कर रहे हैं.
देश की सबसे पुरानी पार्टी के रूप में पहचानी जाने वाली पार्टी कांग्रेस की पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी हार हुई थी. यह हार इतनी बड़ी थी कि भाजपा की
लोकसभा चुनावों से पूर्व ही विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर ईवीएम व वीवीपैट को लेकर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जाते रहे हैं. साथ ही एनआरसी व वोटर लिस्ट के
तमाम ओपिनियन पोल केरल में वाम मोर्चा को 5 से कम सीटें दे रहे हैं. वहीं सभी ओपिनियन पोल इस बात पर सहमत हैं कि पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा
दोस्तों, इकोलॉजी में ‘कंपीटिटिव एक्सक्लूशन प्रिंसिपल’ नामक एक अवधारणा है. सिद्धांत यह है कि एक ही संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले दो जीव दीर्घकालिक समय के लिए सह-अस्तित्व में नहीं रह सकते.
रोज़गार मुक्त राष्ट्रवाद! यह किसी भाजपा विरोधी पार्टी का नारा नहीं है बल्कि ‘दैनिक भास्कर’ का दिया हुआ जजमेंट है. आप सोच रहे होंगे कि अखबार कोई जज तो है
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनावी कड़ाही चढ़ चुकी है. चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल जीत के ‘पकवान’ तलने में जुटे हुए हैं. कुछ पार्टियां अहंकार से
हिंदुत्व के आन्दोलन से जुड़े संगठनों और उनसे सहानुभूति रखने वाले राजनीतिक दलों पर यह आरोप अक्सर ही लगता है कि जिस वैभवकाल को ये वापस लाने की बात करते
हम भारतीय ‘अतिथि देवो भव:’ की बात करने वाले लोग हैं. हमारे घर में जब भी कोई मेहमान आता है तो.हम यह प्रयास करते हैं कि उसकी सुख-सुविधा में किसी