लोकसभा चुनावों से पूर्व ही विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर ईवीएम व वीवीपैट को लेकर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जाते रहे हैं. साथ ही एनआरसी व वोटर लिस्ट के मुद्दे पर भी विपक्ष द्वारा सरकार व चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए गए थे. समय-समय पर चुनाव आयोग ने इन सभी सवालों का जवाब भी दिया है.
पहले चरण की वोटिंग के दौरान व उससे पूर्व ऐसे कई प्रकरण सामने आए थे, जिनमें लोगों ने कहा कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. हाल ही में ऐसा ही एक और मामला सामने आया है.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ इस बार लोकसभा चुनाव में वोटिंग नहीं कर पाएंगें. इससे पहले द्रविड़ ने हर बार चुनाव में वोट डाला है. हैरानी की बात यह है कि गत वर्ष ही कर्नाटक चुनाव आयोग द्वारा राहुल को ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया था. ऐसे में उनका नाम वोटर लिस्ट में न होना विवादास्पद हो सकता था.
दरअसल, राहुल द्रविड़ के भाई विजय ने 31 अक्टूबर 2018 को द्रविड़ और उनकी पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के लिए एक फॉर्म जमा किया था. उन्होंने बताया था कि राहुल द्रविड़ व उनकी पत्नी विजेता द्रविड़ अब इंदिरानगर से आरएमवी एक्सटेंशन के अश्वथनगर में शिफ्ट हो चुकें हैं. इसके बाद द्रविड़ और उनकी पत्नी के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिए गए थे.
डोम्लूर सब डिवीज़न के सहायक निर्वाचन रिटर्निंग अधिकारी बासावराजू मागी ने इस बात की पुष्टि की. श्री मागी ने कहा कि द्रविड़ के भाई विजय ने डिलीशन फॉर्म जमा किया था. उन्होंने बताया कि नाम हटवाने के बाद राहुल द्रविड़ ने नाम दोबारा शामिल करवाने के लिए फॉर्म 6 नहीं भरा था.
यदि उन्होंने फॉर्म 6 भरा होता तो उनका नाम वोटर लिस्ट में होता. बता दें कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए जो अंतिम तिथि जारी की गई थी, वह भी निकल चुकी है.
हालांकि, राहुल का नाम वोटर लिस्ट से हटने के बाद डोर टू डोर सर्वे (स्पेशल ड्राइव) के दैरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) राहुल द्रविड़ के घर भी गए थे लेकिन उन्हें घर में एंट्री नही मिली. उन्हें बताया गया कि राहुल द्रविड़ देश से बाहर गए हुए हैं और उन्होंने अपना नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने का कोई संदेश नहीं दिया है.
द्रविड़ ने बाद में बासावराजू मागी से संपर्क भी किया और पूछा कि क्या उनका नाम इंदिरानगर वोटिंग लिस्ट में शामिल हो सकता है. मागी ने इस बारे में कहा कि द्रविड़ स्पेन में थे लेकिन वह किसी भी कीमत पर वोट डालना चाहते थे. लेकिन उनका नाम शांतिनगर की वोटर लिस्ट से हट चुका था.
मागी ने आगे कहा कि मैने उन्हें कहा था कि अगर वह चाहते हैं कि उनका नाम शांतिनगर वोटिंग लिस्ट में हो तो उन्हें फॉर्म 6 जमा करना होगा और ऐसा 23 अप्रैल के बाद ही हो सकता है, जब चुनाव आयोग इसकी अनुमति प्रदान कर देगा.
इससे पूर्व भी वोटर लिस्ट से नाम कटने के मामले में कई बड़े नाम सामने आ चुके हैं. जिनमें मारुति के चेयरमैन आरसी भार्गव व अपोलो हॉस्पिटल्स की वाइस चेयरपर्सन शोभना कामिनेनी के नाम शामिल हैं.
शोभना कमिनेनी के विषय में चुनाव आयोग ने कहा था कि सितंबर 2017 के बाद शोभना का नाम वोटर लिस्ट में दो जगह आ गया, बाद में किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से दोनों जगह से नाम हट गया.
चुनाव रजिस्ट्रेशन अफसर (ERO) से इस बारे में जवाब मांगा गया है और जांच की जा रही है. ये साफ तौर पर ERO की लापरवाही है. हमें मालूम है कि इस जवाब से कोई वोटर संतुष्ट नहीं होगा लेकिन पूरी कोशिश कर रहे हैं कि आगे से ऐसी गलती न हो.
BLO द्वारा नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, नाम काटने के लिए फॉर्म 7 व नाम सुधार हेतु फॉर्म 8 भराया जाता है. यदि यह माना जाए कि इसमें कई दफा बीएलओ द्वारा गलतियां की जाती होंगी, तब भी ERO द्वारा इस हेतु जांच की जानी चाहिए. यदि इन दोनों स्तर पर गलतियां नहीं होती हैं, तब भी गलतियों की जड़ कम्प्यूटर ऑपरेटर्स होते हैं.
यहां महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यदि कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा प्रिंट की गई वोटर लिस्ट को ERO के माध्यम से संबंधित BLO को उपलब्ध कराई जाए व BLO के “ओके टेस्टेड” के बाद ही वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन किया जाए तो ऐसी गलतियां होने की संभावनाएं शून्य हो जाएंगीं. लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा नहीं किया जाता है.
यही कारण है कि वोटर लिस्ट में नियमित रूप से गलतियां प्राप्त होती रहती हैं.
बहरहाल, द्रविड़ का मुद्दा विवादास्पद बिल्कुल नहीं है क्योंकि इसमें द्रविड़ की ही गलती है. यदि उन्होंने समय रहते फॉर्म 6 भरा होता तो वह वोट डाल सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि इस मुद्दे के सामने आने के बाद विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग व सरकार को निशाना पर लिया जा सकता है, क्योंकि यह विपक्ष की परंपरा रही है. विपक्ष द्वारा प्रत्येक मुद्दे पर सरकार को ही घेरा जाता रहा है, चाहे उसका ज़िम्मेदार कोई भी हो.
