बात तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में था. मैंने तब अपने आप को यह स्वतंत्रता दी कि मैं आगे क्या करूँ. मेरे परिवार में बहुत
बात तब की है जब मैं अपने इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में था. मैंने तब अपने आप को यह स्वतंत्रता दी कि मैं आगे क्या करूँ. मेरे परिवार में बहुत
आज की राजनैतिक परिस्थितियों को देखते हुए हमें एक बार इतिहास में जाने की आवश्यकता है. क्या होगा, या क्या नहीं होगा, यह तो बाद की बात है. पहले यह
बड़ा बवाल हो रहा है सर्फ एक्सेल को लेकर. कहा जा रहा है कि यह लव जिहाद का एक प्रकार से प्रमोशन है. इस नश्वर संसार में अगर चिरकाल तक
पाकिस्तान से जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं, वह कश्मीर की लड़ाई नही है. पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद ही कश्मीर को पाने की उम्मीद छोड़ दी थी.
हे पिंगल, पाणिनि, कल्हण और अभिनव गुप्त की संतानों, भरत, क्षेमेंद्र और आनंद वर्द्धन के वंशजों! विडम्बना है कि तुम्हारे पूर्वजों ने ही समूची दुनिया को पहली बार बताया था
कुछ समय पहले दिल्ली में हुई LGBT प्राइड परेड में कुछ ऐसा सामने आया जो एक बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा था. परेड में शामिल हुए LGBT समुदाय के
सवेरे ट्विटर खोला तो नज़र पड़ी देश की एक दुखदायक घटना पर. एक मोहतरमा को परीक्षा में केवल इसलिए नहीं बैठने दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब पहन रखा था. वैसे