“छोड़ सियार भाई कुल्हड़ के आसा, तमासा बन जाइब, होइहे निरासा…” भोजपुरिया गीत है. मनोज तिवारी का गाया हुआ. लेकिन हम यहां इन गाने की बात क्यों कर रहे हैं.
“छोड़ सियार भाई कुल्हड़ के आसा, तमासा बन जाइब, होइहे निरासा…” भोजपुरिया गीत है. मनोज तिवारी का गाया हुआ. लेकिन हम यहां इन गाने की बात क्यों कर रहे हैं.
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनावी कड़ाही चढ़ चुकी है. चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल जीत के ‘पकवान’ तलने में जुटे हुए हैं. कुछ पार्टियां अहंकार से
लो भइया! ज़िल्ले- इलाही का फरमान आ गया. टैक्स तो सबको चुकाना होगा. छोटा हो या बड़ा, नाटा हो या लंबा, पतला हो या मोटा. देश के भावी प्रधानमंत्री पद
कांग्रेस मैनीफेस्टो को पढ़ने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि यह मैनीफेस्टो नुकसान को सीमित करने की दृष्टि से लिखा गया है, न कि सत्ता प्राप्त करने के लिए. एक
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आसन्न लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है. घोषणापत्र तो क्या मैं इसे चेतावनी पत्र कहूँगा. अपने घोषणापत्र में कांग्रेस पार्टी कहती है
क्या कांग्रेस देशद्रोहियों को शह दे रही है? आगामी लोकसभा चुनाव ‘चिरजीवी’ भारत के भविष्य को तय करेंगें. यह वाक्य लिखना इसलिए लिखना पड़ रहा है क्योंकि भारत के टुकड़े करने का ‘प्लान’ एक
आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को कालाहांडी में जनता को संबोधित करते देखा तो याद आया. कालाहांडी, जहाँ से श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1980 में ग़रीबी हटाओ
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने की जैसे ही खबरें आना शुरू हुई थीं, वैसे ही राहुल पर छींटाकशी करना शुरू कर दिया गया था. कुछ नेताओं
लोकसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस की मुसीबत थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलें आगामी चुनाव का गणित भी बिगाड़ सकती हैं. कांग्रेस के लिए समस्याएं
आज की राजनैतिक परिस्थितियों को देखते हुए हमें एक बार इतिहास में जाने की आवश्यकता है. क्या होगा, या क्या नहीं होगा, यह तो बाद की बात है. पहले यह