क्या कांग्रेस देशद्रोहियों को शह दे रही है?
आगामी लोकसभा चुनाव ‘चिरजीवी’ भारत के भविष्य को तय करेंगें. यह वाक्य लिखना इसलिए लिखना पड़ रहा है क्योंकि भारत के टुकड़े करने का ‘प्लान’ एक बार फिर तैयार किया जा रहा है. यह प्लान 1947 की ही तरह राजनीतिक दलों द्वारा तैयार किया जा रहा है.
1947 में मुस्लिम लीग व कांग्रेस ने मिलकर भारत का बंटवारा किया था और आज एक बार फिर उसी राजनीतिक दल ने भारत के खिलाफ कार्य करने वाले लोगों को शह देने की मंशा के साथ मेनिफेस्टो प्रस्तुत किया है.
कांग्रेस द्वारा आज एक ऐसा घोषणा पत्र जारी किया गया है जिसमें देशद्रोह के कानून को खत्म करने व सेना के विरुद्ध मुकदमा न चलने वाले कानून ‘अफस्पा’ में संसोधन करने का जिक्र किया गया है. मतलब यदि कोई व्यक्ति अपने घर में पाकिस्तान का झंडा भी फहराएगा तो उस पर देशद्रोह का कानून नहीं लगाया जाएगा.
लेकिन यदि भारतीय सेना का कोई सैनिक किसी के घर में छापेमारी करता है, और यदि किसी आतंकी समर्थक ने उस सैनिक पर एफआईआर दर्ज करा दी तो सैनिक पर मुकदमा चलाया जाएगा. इसका सीधा अर्थ यह है कि देशद्रोहियों की मदद की जाएगी व देश की रक्षा करने वाले सैनिकों पर केस दर्ज किया जाएगा.
कांग्रेस के इस चुनावी घोषणा पत्र पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी निशाना साधते हुए कहा कि यह घोषणापत्र भारत की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने वाला है. वित्त मंत्री ने इसे भारत को कमजोर बनाने वाला चॉर्टर बताया.
वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी इस तरह का घोषणा करती है तो उसे एक भी वोट पाने का अधिकार नहीं है. जेटली ने कहा; “कांग्रेस की एक ड्राफ्टिंग कमेटी है लेकिन ऐसा लगता है कि इस घोषणापत्र के कुछ अंशों जो जम्मू-कश्मीर से संबंधित हैं उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के दोस्तों ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने तैयार किया है.”
साथ ही, श्री जेटली ने कहा कि अपने घोषणापत्र में कांग्रेस देशद्रोह की धारा 124ए को हटाने और आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) की समीक्षा करने की बात कह रही है. ऐसा करके वह जम्मू-कश्मीर में सेना को कमजोर और पत्थरबाजों को मजबूत करना चाहती है.
वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि इन कानूनों को बदलने का साहस जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मनमोहन सिंह जैसे नेताओं ने भी नहीं किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि नासमझी में राहुल गांधी ऐसे वादे करते हैं जिन्हें लागू नहीं किया जा सकता और कुछ बेहद खतरनाक विचार है और देश उनकी बात स्वीकार करने को तैयार नहीं है.
यहां विषय यह है कि एक ओर देश के सैनिक देश की सुरक्षा के लिए जान तक न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं, किन्तु यदि कांग्रेस द्वारा अफ्सपा को हटाया गया तो क्या कोई भी सैनिक आतंकियों को पकड़ने के लिए छापेमारी करेगा.
हर रोज़ ‛संविधान खतरे में है’ कr दुहाई देने वाली कांग्रेस केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए भारतीय कानूनसे खिलवाड़ करने की घोषणा कर रही है. यहां एक बात और स्पष्ट है कि यदि देश द्रोह कानून को समाप्त किया गया तो जेएनयू की तरह ‘भारत तेरे टुकड़े होंगें…’ जैसे नारे हर चौराहे पर सुनाई देने लगेंगें.
