कांग्रेस के मैनीफेस्टो में “सन्नाटे का शोर” बहुत कुछ कह गया

कांग्रेस मैनीफेस्टो को पढ़ने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि यह मैनीफेस्टो नुकसान को सीमित करने की दृष्टि से लिखा गया है, न कि सत्ता प्राप्त करने के लिए. एक तरह से कांग्रेसियों ने हार मान ली है और वे  किसी भी तरह से पिछले चुनाव में मिली 44 सीटों में से एक भी सीट का नुकसान नहीं करना चाहते.

मुझे आशा थी कि कांग्रेस का मैनीफेस्टो प्रधानमंत्री मोदी और NDA सरकार को भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और उसमे लिप्त रहने से भरा होगा तथा कांग्रेसी यह हुंकार भरेंगे कि कैसे वे भ्रष्टाचार समाप्त कर देंगे.  मैनीफेस्टो यह दावा करेगा कि मोदी सरकार भ्रष्ट है, क्योकि राहुल पिछले एक वर्ष से सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे थे.

मैनीफेस्टो में रफाल डील और घोटालेबाजों के देश छोड़कर भाग जाने की ‘परिस्थितियों’ की जांच का वायदा तो किया गया है लेकिन किसी घोटाले का आरोप नहीं लगाया है और घोटाले के जांच की बात नहीं कही गयी. एक तरह से कांग्रेस ने यह स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री मोदी और NDA सरकार ने एक स्वच्छ और साफ़-सुथरा प्रशासन दिया.

फिर मैंने देखना शुरू किया कि भारत की विकास दर के बारे में क्या लिखा है. इस पर भी मैनीफेस्टो ने चुप्पी साध ली. दबी जुबान से यह तो लिखा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे नयी सड़क, रेल और बिजली आदि के कारण विकास दर प्रभावित हुई है, लेकिन किसके कार्यकाल में प्रभावित हुई है, उसपे चुप बैठ गए.

मैनीफेस्टो ने महंगाई बढ़ने का आरोप भी नहीं लगाया और न ही महंगाई कम करने के नाम पर वोट माँगा है. महँगाई है ही नहीं तो घटाने का वादा कैसे करते?

आतंकवाद के बारे में भी कांग्रेसियों ने यह रोना नहीं रोया कि भारत में लोग आतंकी हमले में मर रहे है और भारतीय अपने-आप को असुरक्षित समझ रहे है. मैनीफेस्टो में ‘टैक्स टेररिज्म’ के लिए प्रधानमंत्री मोदी को दोषी ठहराया गया है. लेकिन उस आतंकवाद, जिसके धर्म या प्रेरणा ग्रन्थ का नाम किसी को भी नहीं पता, के हमले को लेकर मैनीफेस्टो चुप है. और कुछ नहीं तो कम से कम प्रधानमंत्री मोदी को दोष तो दे ही सकते थे.

मैनीफेस्टो ने यह भी नहीं कहा कि वे SC एक्ट को हटा देंगे. न ही मैनीफेस्टो में कांग्रेसियों ने यह दावा किया कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का होगा. पता नहीं कांग्रेसी कैसे प्राकृतिक संसाधनों का वितरण करेंगे? कही ऐसा तो नहीं सभी संसाधनों पर दामाद जी का ही अधिकार होगा?

कांग्रेस ने यह भी नहीं बताया कि कैसे वे  न्यायलय, चुनाव आयोग, सीबीआई, विजिलेंस, CAG आदि संस्थाओं की स्वायत्तता बनाएं रखेंगे. क्या वे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सीबीआई निदेशक की नियुक्ति और बर्खास्तगी वाली समिति से हटाकर स्वायत्तता सुनिश्चित करेंगे? इसके विपरीत मैनीफेस्टो लिखता है कि राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाएगी.

मैनीफेस्टो में भारत के टुकड़े-टुकड़े करने वाले गैंग और नक्सलवादियों से कड़ाई से निपटने का भी आश्वासन नहीं दिया, जैसे कि यह समस्या अस्तित्व में ही नहीं है. इसके विपरीत, कोंग्रेसी राजद्रोह को अपराध की श्रेणी से हटा देंगे जिससे टुकड़े-टुकड़े करने वाला गैंग JNU के बाहर भी ऐसे नारे लगा सके.

जम्मू-कश्मीर के मामले में मैनीफेस्टो मेरी आशाओं से आगे निकल गया. कांग्रेसी लिखते है कि जम्मू-कश्मीर के लोगो के मुद्दों का सम्मानजनक समाधान खोजने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है और वे इसके लिए तीन वार्ताकारों की नियुक्ति करेंगे.

समस्या यह है कि क्या पहले वे बातचीत नहीं कर रहे थे? वर्ष 2010 में सोनिया सरकार ने दिलीप पड़गांवकर, एम एम अंसारी और राधा कुमार को जम्मू-कश्मीर के मामले को सुलझाने के लिए वार्ताकार नियुक्त किया था. क्या परिणाम निकला? कैसे वह वहां के ‘भोले-भाले’.और ‘रूठे’ हुए लोगो को कौन सा लॉलीपॉप देकर मनाएंगे?

फिर, मैनीफेस्टो में कश्मीरी पंडितों, आतंकवाद और अलगाववाद, और प्रायोजित आतंकवाद पे चुप है. क्या कश्मीरी पंडितों को अपने घर वापस नहीं लौटना चाहिए? धारा 370 पर भी मैनीफेस्टो में सन्नाटा है.

अंत में, पूरे मैनीफेस्टो में सेकुलरिज्म या धर्मनिरपेक्षता शब्द का प्रयोग एक बार भी नहीं किया गया है? गौ वंश की भक्षा के अधिकार की भी बात नहीं की है. और तो और, यह भी आश्वासन नहीं दिया कि ढांचा वही बनाएंगे. कही ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस भी अब कम्युनल या सांप्रदायिक पार्टी हो गयी है.

1 Comment

  1. April 3, 2019 - 7:40 pm

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