लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनावी कड़ाही चढ़ चुकी है. चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल जीत के ‘पकवान’ तलने में जुटे हुए हैं. कुछ पार्टियां अहंकार से
इस देश का यह दुर्भाग्य ही है कि आज़ादी के 70 सालों बाद भी राजनीतिक दल जातिवाद की राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं. एक ओर तो राजनीतिक
हम भारतीय ‘अतिथि देवो भव:’ की बात करने वाले लोग हैं. हमारे घर में जब भी कोई मेहमान आता है तो.हम यह प्रयास करते हैं कि उसकी सुख-सुविधा में किसी
लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं लेकिन राजनीतिक दलों की बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है. हालात ऐसे हैं कि नेताओं द्वारा हर रोज़ एक नया शिगूफा छोड़
‘भारत’ केवल नाम ही काफ़ी है. आज भारत विश्व महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर है. भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. वह दिन दूर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अगस्ता-वेस्टलैंड वीआईपी चॉपर घोटाले में बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में हलफनामा दायर किया. इस हलफनामे में ईडी ने अदालत से अगस्ता वेस्टलैंड मामले
भारतीय रेलवे ने पीएम मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कैंपेन के मामले में काफी प्रगित हासिल की है. रेलवे की इंडियन कोच फैक्ट्री, माडर्न कोच फैक्ट्री और रेल कोच फैक्ट्री ने मिलकर वित्त वर्ष 2018-19 में
क्या कांग्रेस देशद्रोहियों को शह दे रही है? आगामी लोकसभा चुनाव ‘चिरजीवी’ भारत के भविष्य को तय करेंगें. यह वाक्य लिखना इसलिए लिखना पड़ रहा है क्योंकि भारत के टुकड़े करने का ‘प्लान’ एक
राजनीतिक लाभ के लिए नेताओं द्वारा शाम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाना आम बात है. लेकिन यदि केवल वोट बैंक के लिए देश को बांटने या अलग संविधान की