भारतीय रेलवे ने पीएम मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कैंपेन के मामले में काफी प्रगित हासिल की है. रेलवे की इंडियन कोच फैक्ट्री, माडर्न कोच फैक्ट्री और रेल कोच फैक्ट्री ने मिलकर वित्त वर्ष 2018-19 में रिकार्ड कोच बनाए हैं.
रेल मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में इस वित्तीय वर्ष में 6037 कोच बनाए गए, जबकि पिछले वर्ष 4470 कोच ही बनाए गए थे. यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी ज्यादा है. भारतीय रेलवे द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड कोच बनाए गए थे, इस बार रेलवे ने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.
चेन्नई स्थिति इंडियन कोच फैक्ट्री ने रिकॉर्ड बनाते हुए चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. विश्व में टॉप कोच मैनुफैक्चरिंग वाले देशों में शामिल हो गया है. चीन सालाना तौर पर 2600 कोच बनाता है. उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित रेल कोच फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2018-19 में रिकार्ड 1425 कोच बनाए गए, जो लक्ष्य से कहीं ज्यादा था.
साल 2017-18 में 710 कोच बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसके मुकाबले में 711 कोच बनाए गए. वहीं 1422 लक्ष्य पर 1425 कोच बनाए गए हैं.
इस वित्त वर्ष माडर्न कोच फैक्ट्री ने नए टाइप के कोच बनाए, जिसमें एसी पैंट्री, कार अंडर स्लंग पावर कार, नॉन एयर कंडीशन चेयर कार, रिसर्च डिजाइन एडं स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन के लिए ट्रैक रिकार्डिंग कार शामिल हैं. इस साल के शरुआत में रिपोर्ट किया गया था कि जनवरी 2019 में सबसे ज्यादा 152 LMB कोच बनाए गए हैं जो कि अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
भारतीय रेलवे द्वारा प्राप्त यह उपलब्धि तब अधिक बड़ी हो जाती है जबकि रेलवे को विभिन्न प्रकार के कोचों के निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गई थी. साथ ही रेलवे के इस रिकॉर्ड की खास बात यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ द्वारा बनाए गए अधिकांश कोच स्वदेशी तकनीक द्वारा बनाया गए हैं.
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार देना व सभी आवश्यक वस्तुओं का निर्माण भारत में ही करना है. साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के द्वारा भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है. DIPP के अनुसार पिछले पांच वर्षों में लगभग 200 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश भारत को प्राप्त हुआ है.
मतलब साफ है कि वित्तीय वर्ष 2013-14 से तक भारत को विदेशी निवेश के लिए दूसरे देशों का मुँह ताकना पड़ता था, लेकिन अब भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण यूरोपीय देशों सहित अन्य देश भी भारत में निवेश करने को तैयार हैं.
सनद रहे कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में भारतीय अर्थव्यवस्था 11वें स्थान पर थी, जबकि अब 5वें स्थान पर है. विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़ों के अनुसार यदि भारतीय अर्थव्यवस्था इसी तरह आगे बढ़ती गई तो 2028 तक विश्व की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकती है.
बहरहाल, ‘मेक इन इंडिया’ द्वारा भारतीय रेलवे की यह उपलब्धि विश्व पटल पर भारत की मज़बूत स्थिति को प्रदर्शित करता है. भारत की यह बढ़ती शक्ति स्पष्ट बताती है कि सरकार द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ के लिए काफ़ी काम किया गया है. हालांकि विपक्ष सरकार पर हर मुद्दे पर आरोप लगाता रहा है. विपक्ष ने कई बार कहा है कि पिछले पांच सालों में मोदी सरकार ने कोई भी काम नहीं किया है. लेकिन रेलवे के ये रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए हैं विपक्ष का आरोपों को सीधे खारिज करते हैं.
