आज विपक्ष पूर्णतः बिखरा हुआ है लेकिन वह एक काम एकजुटता के साथ कर रहा है – दोषारोपण. देश में कोई भी छोटी या बड़ी घटना हो जाती है, तो
आज विपक्ष पूर्णतः बिखरा हुआ है लेकिन वह एक काम एकजुटता के साथ कर रहा है – दोषारोपण. देश में कोई भी छोटी या बड़ी घटना हो जाती है, तो
भारतीय राजनीति स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक जटिल दौर से गुज़र रही है. इसे यदि यूँ कहा जाए कि भारत की वर्तमान राजनीति कुटिल हो गई है तो अतिशयोक्ति
कहा जाता है कि जब आप एक उंगली सामने वाले पर उठाते हैं तो 4 उंगलियाँ आपकी तरफ उठती हैं. राजनीति में छींटाकशी तो आम बात है पर कई बार
भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने भारत में सबसे अधिक राज किया है. एक समय यह पार्टी भारत में शिखर पर होती थी, लेकिन वंशवाद, खराब नीतियों व घोटालों
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक बयान ‘पकौड़े बेचना भी रोजगार है’ को तूल देकर पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार की घेराबंदी की थी. कांग्रेस नेताओं ने कहा था
राफ़ेल मुद्दे पर हर दिन कोई न कोई नया मोड़ ज़रूर आ रहा है. इससे यह अब और भी रोचक हो गया है. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आज
अपने भाषणों के लिए हमेशा ही चर्चा में रहने वाले राहुल गांधी इस बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. यूँ तो कांग्रेस के अध्यक्ष होने के नाते उन्हें
2019 के महासंग्राम की रणभेरी बजने से पहले जनता का मन टटोलने के लिए राजनैतिक पार्टियाँ लगी हुई हैं. राजनैतिक पार्टियों के कार्यकर्ता ज़मीन पर कार्य कर रहे हैं. जनता
आज भारत की राजनीति में संवेदनहीनता का एक और काला अध्याय लिख दिया गया. देश की जनता का भविष्य और विश्वास उसके जन-प्रतिनिधि पर टिका हुआ होता है. लोकतंत्र को
राहुल गांधी क्यों झूठ बोल रहे है? – ये सवाल आज हर भारतीय के मन मे आना चाहिए. आखिर वे चाहते क्या है? राफेल मुद्दे पे एक के बाद एक