राफ़ेल मुद्दे पर हर दिन कोई न कोई नया मोड़ ज़रूर आ रहा है. इससे यह अब और भी रोचक हो गया है. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आज दावा दावा किया कि रक्षा मंत्रालय से राफेल दस्तावेज चोरी नहीं हुए थे. सुप्रीम कोर्ट में उनके कहने का मतलब यह था कि आवेदन में याचिकाकर्ताओं ने राफ़ेल सम्बंधी उन दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी का इस्तेमाल किया था, जिन्हें सरकार द्वारा गोपनीय माना गया था.
अटॉर्नी जनरल ने कल बताया किया कि उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘रक्षा मंत्रालय से राफ़ेल सम्बंधी दस्तावेज चोरी हो गए हैं’ कहने जो आरोप विपक्ष लगा रहा है, वह पूरी तरह गलत और भ्रामक है. अटॉर्नी जनरल ने आगे कहा कि यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी एवं प्रशांत भूषण की ओर से दायर याचिका में अदालत से राफेल सौदे के खिलाफ जांच के लिए याचिका खारिज करने के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी. इस याचिका में इन लोगों ने तीन दस्तावेजों को आधार बनाया था, जो ओरिजनल नहीं थे बल्कि मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी थे.
ज्ञात हो कि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सीधा हमला प्रधानमंत्री पर बोला था. राहुल गांधी ने कहा था अगर सरकार कह रही है कि राफेल सौदे के दस्तावेज चोरी होने से ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन हुआ है, तो एफआईआर दर्ज कराएं. पीएमओ का मतलब प्रधानमंत्री ऑफिस नहीं, सीधे प्रधानमंत्री है. इसके अतिरिक्त अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर सवालिया निशान लगाए थे.
हालांकि मीडिया ख़बरों की माने तो अटॉर्नी जनरल ने अब इसे ‘फोटोकॉपी’ इसलिए कहा है ताकि विपक्ष के हमले से बचा जा सके. लेकिन अब यदि अटॉर्नी जनरल का दावा सत्य साबित होता है तो विपक्ष पर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाएगा कि उसने देश में भ्रम फैलाने के लिए ‘चोरी’ शब्द का बार-बार उपयोग किया. ख़ैर, सत्य क्या है यह तो 14 मार्च को ही पता चल पाएगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर अगली सुनवाई की तारीख 14 मार्च निश्चित की है
