कहा जाता है कि जब आप एक उंगली सामने वाले पर उठाते हैं तो 4 उंगलियाँ आपकी तरफ उठती हैं. राजनीति में छींटाकशी तो आम बात है पर कई बार कुछ मामले संवदेनशील होते हैं और उनके बारे में टिप्पणियां करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.
राहुल गाँधी आज नरेंद्र मोदी और अजीत डोवाल पर उंगली उठाते समय अपनी तरफ उठने वाली उंगलियों को भूल गए. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि ‘पीएम मोदी को को CRPF के शहीदों के परिवारों को बताना चाहिए कि उनके कातिल मसूद अजहर को किसने रिहा किया था. साथ ही वह ये भी बताएं कि आपके वर्तमान NSA ने ही कातिल मसूद को पकिस्तान को सौंपा था.
जहां एक तरफ राहुल गांधी की कही हुई बातें सच हैं वहीं दूसरी तरफ कई महत्वपूर्ण तथ्यों और कंधार केस के दौरान काँग्रेस पार्टी और बाकी पार्टियों का रवैया भी साफ करना ज़रूरी है. यह बात आम जनता शायद ही जानती होगी कि असल में उस वक्त कांग्रेस पार्टी ने महत्वपूर्ण फैसलों के समय क्या रुख अपनाया था.
राहुल गांधी यह लिखना भूल गए कि 94-96 तक उनकी सरकार और 96-98, 96-02 फारूक अब्दुल्लाह की सरकार जिन्हें कांग्रेस का समर्थन था, उन्होंने मसूद को गिरफ्तार कर उसे फांसी की सज़ा क्यों नहीं दिलवाई. 1994 से मसूद की कस्टडी हमारे देश के पास थी पर फिर भी राहुल गांधी के इस पर सवाल उठाने के लिए 2019 तक की प्रतीक्षा क्यों की?
कंधार के समय देश एक राष्ट्रीय आपदा से गुज़र रहा था तब लेफ्ट के वृंदा करात प्रेस कांफ्रेस में अगवा हुए लोगों के परिवारों को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर दबाव बनाने के लिए साथ ले आईं. जहां धैर्य और दृढ़ निश्चय के साथ काम लेने की ज़रूरत थी वहां परिवारों के रोते बिलखते चहरे देख कर भावुक होकर फैसले लेने पड़ गए. यही नहीं बल्कि उस समय भी सभी पार्टियों की एक बैठक बुलाई गई थी जिसमें विपक्षी पार्टियों ने चूं तक नहीं की.
इसी मीटिंग में यह तय होना था कि मसूद को रिहा किया जाएगा या नहीं. पार्टियों की बैठक में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया और उस विपदा की घड़ी में सारा दारोमदार NDA सरकार पर डाल दिया गया. राहुल गांधी अपनी पार्टी और अन्य विपक्षी पार्टियों पर उस समय कोई भी सवाल न खड़ा करने पर कोई टिपण्णी नहीं दे पाए. राहुल गांधी यह भूल चुके हैं कि उस समय लिए गए फैसलों में देश की सभी पार्टियों का बराबर हाथ है.
यही नहीं 2010 में गुडविल जेस्चर के तहत पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते बनाने के लिए मसूद की UPA सरकार ने ही रिहा किया था. आप सोचिए कि गुडविल जेस्चर के लिए क्या नहीं किया जा सकता था? पर एक आतंकी को रिहा करने किस हिसाब से गुडविल जेस्चर है?
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी जी मसूद रिहा करने के इच्छुक नहीं थे पर UPA और लेफ्ट के लोगों ने धरना प्रदर्शन, आंदोलन और तोड़फोड़ कर NDA पर दबाव बना कर मसूद को छुड़वाया था.
राहुल गांधी का यह बेहद ही शर्मनाक ट्वीट था. जब देश के साथ रहने की ज़रूरत है तब वो देश के लोगों को भड़काने वाले बयान दे रहे हैं.
