आज विपक्ष पूर्णतः बिखरा हुआ है लेकिन वह एक काम एकजुटता के साथ कर रहा है – दोषारोपण. देश में कोई भी छोटी या बड़ी घटना हो जाती है, तो उसका ठीकरा केंद्र सरकार के सर फोड़ने का काम विपक्ष भली भांति व दृढ़ता के साथ कर रहा है, चाहे उस घटना का केंद्र सरकार से सरोकार हो या नहीं.
गौरतलब है कि विपक्ष यह कार्य विगत वर्षों से ही करता आ रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में दोषारोपण तेज़ी से हो रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण रविवार शाम देखने को मिला. जब चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता लागू करते हुए आगामी लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की. इस पर विपक्ष यह मुद्दा बना रहा है कि कुछ राज्यों में चुनाव तुलनात्मक रूप से अधिक चरणों में (अधिक दिनों तक) होंगे, जिसका सीधा फ़ायदा भाजपा को मिलेगा.
विपक्ष के आरोपों की वजह यह है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटों के लिए मतदान सात चरणों में होगा जबकि बंगाल की 42 और बिहार की 40 सीटों के लिए भी इतने ही चरण में मतदान होना है. लेकिन 39 सीटों वाले तमिलनाडु में एक चरण और 48 सीटों वाले महाराष्ट्र में चार चरणों में चुनाव होने हैं. इससे विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि क्या भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए ही बंगाल में सात चरणों में चुनाव कराए जा रहे है. चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद बंगाल में सत्तारुढ़ ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को घेरते हुए भाजपा पर आरोप लगा दिया है. हालांकि भाजपा ने इस पर अपना मत स्पष्ट करते हुए कहा है कि सात चरणों में चुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले का मतलब कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प है.
ज्ञात हो कि बीते साल हुए पंचायत चुनावों में भी बंगाल में भयंकर हिंसा हुई थी. जिससे जान माल की क्षति भी हुई थी. चुनाव आयोग को पता है कि बंगाल की वर्तमान स्थिति क्या है, इसलिए ही आयोग ने सात चरणों के विकल्प को चुना. अब से पहले 2009 व 2014 में भी बंगाल में पांच चरणों में चुनाव हो चुका है. बंगाल में पांच चरणों मे जब चुनाव हुए थे तब राज्य में माओवाद सबसे बड़ी समस्या थी. साथ ही पहाड़ी इलाकों में अलगाववादी आंदोलन भी चरम पर थे. अब जबकि सात चरणों में चुनाव होने हैं, बंगाल में हिंसा की संभावना से बचना ही चुनाव आयोग का एकमात्र उद्देश्य समझ आता है.
इसके अतिरिक्त रमजान का महीना होने की वजह से भी तृणमूल कांग्रेस, आप सहित कई अन्य राजनीतिक दलों व अल्पसंख्यक संगठनों ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर प्रश्न चिन्ह लगाया है. इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि शुक्रवार व त्यौहार के दिन मतदान नहीं रखा गया है. भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि हिंदू भाई भी व्रत करते हैं, वो भी तो मतदान करते हैं. रोजा रखने वाले लोग दफ्तर जाते हैं, अपना काम करते हैं. यह पहला मौका नहीं है कि जब रमजान में मतदान हो रहा है. इस पर सवाल नहीं उठाने चाहिए.
