कश्मीरी हिन्दू पलायन के बारे में तथ्य समझने के लिए आपके पास एक बेहतर ऐतिहासिक समझ होनी चाहिए. राजनैतिक विश्लेषण से अधिक सामाजिक विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है. राजनीतिक और वैश्विक
कश्मीरी हिन्दू पलायन के बारे में तथ्य समझने के लिए आपके पास एक बेहतर ऐतिहासिक समझ होनी चाहिए. राजनैतिक विश्लेषण से अधिक सामाजिक विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है. राजनीतिक और वैश्विक
केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम 1967 के तहत जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट को गैरकानूनी संगठन घोषित किया. यह कदम सरकार
पाकिस्तान से जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं, वह कश्मीर की लड़ाई नही है. पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद ही कश्मीर को पाने की उम्मीद छोड़ दी थी.
बालकोट हमले के बाद पकिस्तान की छटपटाहट जायज़ है. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान नकारता रहा था कि भारत ने कोई हमला नहीं किया है. इस बार के हमले
अनेकता में एकता की विशिष्ट पहचान रखने वाला एकमात्र राष्ट्र है भारत. यहाँ सभी को समानता का अधिकार प्राप्त है किन्तु एक राज्य ऐसा है जहाँ समानता के अधिकार का
चीन के किसी डिप्लोमैट ने भारतीय डिप्लोमेसी का मजाक उड़ाते हुए कभी कहा था; “वे (भारतीय) किसी मुद्दे पर बात करते हैं और फिर बात करते हैं और फिर बात
पिछले सप्ताह कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए हमले में हमारे सीआरपीएफ के ४४ जवान शहीद हो गए. इसके बाद पूरे देश में पाकिस्तान
कश्मीर जो प्राकृतिक सुंदरता का अनुपम उदाहरण व स्वर्ग का प्रतीक है, अर्थात् धरती का स्वर्ग है कश्मीर. 26 अक्टूबर 1947 को जब कश्मीर के शासक राजा हरिसिंह गौर ने
देश के सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बाद से जो आक्रोध और शोक की लहर पूरे देश में देखने को मिल रही है, वह पाकिस्तान को भी अंदर से ज़रूर
बनारस के चौबेपुर इलाके का छोटा सा तोफापुर गाँव जहाँ कभी पिता श्याम नारायण यादव ने इस आस में अपना खेत गिरवी रख दिया था कि एक दिन बेटा रमेश