प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूँ’ के चुनावी अभियान की हुंकार भर के वंशवादी चोरों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और गबन के आरोपों में जमानत पर छूटे नेताओं की नींद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूँ’ के चुनावी अभियान की हुंकार भर के वंशवादी चोरों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और गबन के आरोपों में जमानत पर छूटे नेताओं की नींद
2019 का चुनावी बिगुल बज चुका है. योद्धा मैदान में हैं. काफी कुछ ऐसा है जिसको लेकर अटकलें चल रही हैं. अब मीडिया का बाजार होता ही ऐसा है जहां पर
भारत में 2014 से ही ‘लोकतंत्र ख़तरे में है’ का राग आए दिन अलापा जाता रहा है. वास्तव में यदि किसी देश में लोकतंत्र खतरे में हो तो यह उस देश के लिए अच्छा
सोशल मीडिया के उत्थान और देश भर में स्मार्टफ़ोन की गहरी पैठ के साथ, हिंदी-भाषी क्षेत्र के व्यावहारिक मतदाता खूब भली भाँति जान रहे हैं कि इस बार मोदी के मुक़ाबले कोई नहीं है. वे अब मीडिया की विवादित राफेल कहानी से मूर्ख बनने के लिए तैयार नहीं हैं. वे जानते हैं कि विपक्ष मुखर है, अनाड़ी है और भ्रम से भरा है. मोदी का अर्थ है स्थिरता, और खंडित गठबंधन का मतलब है समझौता, भ्रष्टाचार और फिर एक बार भाई-भतीजावाद वाली सरकार.
कुल मिलाकर खबरों के बिचौलियों का व्यापार अब मंदा पड़ गया है. इसका असर यह है कि उनका प्रभाव भी कम हो गया है. कई बड़े पत्रकारों की सार्वजनिक खीझ और बौखलाहट से साफ़ दिखाई पड़ता है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बदलते वक्त के साथ वे अपने आप को कैसे बदलें.
वैसे प्रियंका का यह बयान उन्होंने खुद दिया है या उनके भाषण लिखने वाले ने बुलवाया है, यह तो हमें नहीं पता, लेकिन इतना अवश्य है कि अब नरेंद्र मोदी के हाथ में एक और हथियार दे दिया गया है. भाषण शैली में मोदी कितने पारंगत हैं, इसको खुद लालू यादव ‘ई मोदिया खाली भाषण का राजा है’ बोलकर पहले ही स्वीकार कर चुके हैं.
मैं 1995-96 में अपने इंडस्ट्रियल टूर के दौरान पहली बार मनोहर पर्रिकर जी से मिला था. तब वह पहली बार विधायक बने थे. IITB के एक ही विभाग से होने
देश के पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर का निधन राजनीति की उस धारा के लिए अपूरणीय क्षति है जिसमें न व्यक्तिगत महत्वकांक्षा के लिए स्थान
लंबे समय से बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर का आज निधन हो गया. 63 साल के पर्रिकर अग्नाशय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे. उन्हें
महाभारत को कुछ दिन ही रह गए हैं. दुर्योधन श्रीकृष्ण से सहायता माँगने द्वारका जा पहुँचा है. उधर जैसे ही पत्रकारों को ख़बर मिली उन्होंने ठान लिया कि ये श्रीकृष्ण