नहीं रहे मनोहर पर्रिकर

लंबे समय से बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर का आज निधन हो गया. 63 साल के पर्रिकर अग्नाशय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे. उन्हें अग्नाश्य में कैंसर हुआ था. पर्रिकर को गोवा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. गोवा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर माइकल लोबो ने गत दिवस बताया था कि उनकी हालत बेहद खराब है व बचने की उम्मीद बेहद कम है. लोबो ने कहा कि पर्रिकरजी शुक्रवार रात बेहद बीमार हो गए थे. आज मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया है, पूरा भारत शोक में डूब गया है. गोवा के मुख्यमंत्री व देश के रक्षामंत्री रहे पर्रिकर सादा जीवन-उच्च विचार के व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे.

मनोहर पर्रिकर की पहचान एक ईमानदार और सादगी भरा जीवन जीने वाले नेताओं में होती रही है. आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट पर्रिकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक थे. वे तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे. लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित पर्रिकर ने विश्व कैंसर दिवस पर कहा था कि मानव मस्तिक किसी भी बीमारी पर जीत पा सकता है, लेकिन जीवन का अंतिम आज  तक कौन नकार सका है भला!

मनोहर पर्रिकर की सादगी के कई किस्से मशहूर थे. गोआ में विधायक, नर प्रतिपक्ष या मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे कई बार स्कूटर पर घूमते दिख जाते थे. गोआ के चौराहों पर कई बार उनको किसी भी दुकान में चाय पीते हुए देखा जा सकता था. वर्तमान समय में इस देश में कुटिल राजनीति का दौर है, इसके बाबजूद पर्रिकर आजीवन बेदाग रहे. मनोहर पर्रिकर को जब गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया, उससे पूर्व की गोवा सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी. पर्रिकर के आने के बाद वहाँ भ्रष्टाचार पर चोट हुई और उन्होंने एक जवाबदेह प्रशासन की नींव रखी.

मनोहर पर्रिकर अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते थे। 2012 में गोआ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने ही पहली बार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित किया. उनकी और प्रधानमंत्री की दोस्ती जगप्रसिद्ध थी. इसलिए प्रधानमंत्री बनने के 6 महीनों से भी कम समय में ही मोदी ने पर्रिकर को रक्षामन्त्री बनाकर दिल्ली बुला लिया. मनोहर पर्रिकर स्वाभव से इतने सरल थे कि उनसे कोई भी व्यक्ति मिल सकता था.रक्षामंत्री व मुख्यमंत्री रहते हुए भी उनके स्वभाव में कभी भी बदलाव नहीं आया था. उनके रक्षामंत्री रहते सेनाओं के आधुनिकीकरण का युग प्रारम्भ हुआ. सैनिकों को बहुप्रतीक्षित वन रैंक वन पेंशन भी उनके ही कार्यकाल मिली। वर्तमान और पूर्व सैनिकों की समस्याएँ सुलझाने के लिए वे सदैव उपलब्ध रहे. वह कर्मठ व जुझारू राष्ट्रभक्त के रूप में सदैव ही याद किए जाएंगे. यह कोई नही भूल सकता कि मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्री रहते हुए सेना को पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की अनुमति मिली थी.

मनोहर पर्रिकर नहीं रहे पर यह प्रश्न बना रहेगा कि क्या भारतीय राजनीति का यह बड़ा स्थान जो आज खाली हुआ है, कभी भर पाएगा या नहीं. राजनीति की काली कोठरी से बेदाग निकलने वाला व्यक्तित्व नहीं रहा. श्रद्धांजलि!