Category: विचार

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कपिल सिब्बल की धमकी से संविधान खतरे में आया है क्या?

राजनैतिक बिसात पर करारी शिकस्त पाने के बाद परंपरागत राजनीति तो यही कहती है कि अपनी पुरानी भूल सुधार कर जनता की अदालत में दोबारा अपना पक्ष रखा जाना चाहिए.

क्या है इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड और कैसे इससे बन रहा है न्यू इंडिया

वर्ष 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट को एक दशक बीत चुका है. इस दौरान भारतीय बैंकिंग व्यवस्था अपने सबसे अधिक उथल-पुथल वाले दौर से गुजरी है. नॉन परफार्मिंग एसेट (N.P.A)

नॉर्थईस्ट का कल्चर मज़ाक का विषय नहीं है लल्लन!

देश का प्रधानमंत्री देश का नेता पहले है और अपने दल का नेता बाद में. इसलिए प्रधानमंत्री का एक डिफॉल्ट सम्मान लोकतंत्र में होना चाहिए. लेकिन बहुत से ‘डिजिटल क्षत्रप’

महापर्व कुंभ: आस्था और संस्कृति का प्रतीक सह उभरता ग्लोबल ब्रांड

कुम्भ महापर्व हिन्दू धर्म के प्राचीनतम पर्वों में से एक है. इस पर्व का उल्लेख वेदों ओर  पुराणों में मिलता है. आध्यात्मिक उत्सव के रूप में कुम्भ का इतिहास काफी

आज की राजनीति और अजेंडा पत्रकारीता

ऐसा लगता है जैसे हर पार्टी अपने तरीके से एजेंडा सेट करने में लगी हुई है. हमारे उत्तर प्रदेश का टीपू तो ‘नए साल में नया प्रधानमंत्री’ को ही एजेंडा

क्या ममता बनर्जी रोक पाएंगी भाजपा के बढ़ते कदम को?

भाजपा के लाख प्रयासों के बाद भी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह को रथयात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी. अमित शाह को

रामलिंगम की हत्या से उजागर हुआ फ़र्ज़ी सेकुलरिस्म का ढोंग

“मैं मस्जिद में आने और प्रार्थना में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हूँ. क्या आप एक हिंदू भगवान को स्वीकार करेंगे? क्या आप हिंदू भगवान को चढ़ाया हुआ भोजन

बिहार को बेरोज़गारी का सेंटर आखिर किसने बनाया राहुल जी?

3 फरवरी को राहुल गाँधी ने पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में रैली की. कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने 28 वर्षों बाद अपने दम पर गाँधी मैदान में

ट्विटर का पक्षपात हुआ उजागर, अब होगी पूछताछ

आधुनिकता के बारे में कहा गया है कि इसकी अंधी दौड़ लोगों को लंगड़ा बना देगी. वही होता हुआ दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है जहां

क्या चीन का पतन शुरू हो गया है?

क्या चीन की शासन -व्यवस्था ध्वस्त होने की कगार पर है? यह प्रश्न आज न केवल अंतराष्ट्रीय जगत में बल्कि खुद चीन के भीतर विद्वानों और बुद्धिजीवियों के बीच चर्चा