आधुनिकता के बारे में कहा गया है कि इसकी अंधी दौड़ लोगों को लंगड़ा बना देगी. वही होता हुआ दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है जहां पर कोई भी व्यक्ति अपने विचार लोगों के समक्ष साझा कर सकता है, परंतु हर बीतते दिन के साथ इसकी विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता जा रहा है.
10 अप्रैल 2018 को फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग ने कहा था कि ‘सिलिकॉन वैली इज़ हाइली लेफ्ट-लीनिंग प्लेस’. उनके इस बयान पर ज़्यादा चर्चा नहीं हुई थी, लेकिन वर्तमान में उनकी कही गयी यह बात सत्य के धरातल पर उतर आई है. कम से कम लोगों की प्रतिक्रियाएं तो इसी तरफ इशारा कर रही हैं. नवंबर 2018 में ट्विटर के CEO जैक डोरसी भारत आये थे. भारत में वह प्रधानमंत्री से लेकर विपक्ष के बड़े नेताओं से भी मिले थे. उनकी मुलाकात राहुल गांधी से भी हुई, लेकिन उनके एक कृत्य ने उनकी मंशा पर संदेह उत्पन्न कर दिया. उनकी एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें वह एक प्लेकार्ड लेकर खड़े हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारत के अंदर क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे चर्चित खेल प्लेकार्ड ही रहा है. उस प्लेकार्ड पर लिखा था ‘स्मैश ब्रह्मिनिकल पैट्रिआर्की‘. इसका मतलब था ‘ब्राम्हणवादी पितृसत्ता बंद करो’. यह उनकी ‘निष्पक्षता’ पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह था.
देश में एक बड़े वर्ग के विरुद्ध ऐसी बातें जैक डोरसी जैसे व्यक्ति के लिए शर्मनाक होनी चाहिए थी. लेकिन शायद सोशल मीडिया के हैशटैग वाली भीड़ में उन्हें यह बात दिखाई नहीं दी कि वो करोड़ों भारतवासियों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं. कई ट्विटर उपयोक्ताओं और भारतीय राजनीति के बड़े लोगों ने इस घटना की निंदा करते हुए अपनी बात रखी थी. इतने बड़े पैमाने पर आक्रोश भड़का तब भी जैक डोरसी का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. लेकिन ट्विटर इंडिया ने क्षमा मांगते हुए एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि ट्विटर के सीईओ के रूप में यह घटना जैक के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता है.
ट्विटर के पूर्वाग्रह और दोहरे मापदंड के अनेक उदाहरण हैं. विवादास्पद बाबा गुरुमीत राम रहीम का ट्विटर हत्था उनके जेल जाते ही ट्विटर द्वारा बंद कर दिया गया जबकि सजायाफ्ता राजनेता लालू प्रसाद जेल में रहकर अपने राजनीतिक कथ्य बदस्तूर ट्वीट कर रहे हैं. सनद रहे कि ये दोनों हत्थे ट्वीटर द्वारा वेरीफायड हैं.
ट्विटर या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जो हो रहा था, उससे कई लोग आहत थे. इसी हफ्ते ट्विटर पर लोगों ने #ProtestAgainstTwitter हैशटैग के साथ अपना आक्रोश प्रकट किया था और ट्विटर कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था. उनका आरोप था कि ट्विटर एक खास विचारधारा को प्रोत्साहित कर रहा है. उसके समर्थकों के एकाउंट्स को ‘प्रमाणित’ किया जा रहा है, जबकि वह समाज में ‘फेक न्यूज़’ का ज़हर फैला रहे हैं. भारत में जातिवाद को ‘प्रोमोट’ कर रहे हैं. दूसरी तरफ जो उनका विरोध कर रहे हैं, उसके एकाउंट्स हास्यास्पद कारण देकर सस्पेंड किए जा रहे हैं. कुछ लोगों ने तो इसमें सीधे सरकार को हस्तक्षेप करने की सलाह दे डाली.
इन सबके बाद अंततः सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सूचना प्रौद्योगिकी पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ लगे पूर्वाग्रह के आरोपों का स्पष्टीकरण देने के लिए 11 फरवरी को ट्विटर इंडिया को तलब किया है. संसदीय समिति, सोशल मीडिया और ऑनलाइन समाचार प्लेटफार्मों पर ‘नागरिकों की सुरक्षा’ के अधिकार के विषय पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा ट्विटर के प्रतिनिधियों के विचारों को सुनने के लिए तैयार है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निष्पक्षता होनी चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता तो सोशल मीडिया का विचारों के आदान प्रदान के लिए एक स्वस्थ्य मंच उपलब्ध कराने का मुख्य उद्देश्य एक मज़ाक बन जाएगा. यही आरोप फेसबुक पर भी लग रहे हैं, लेकिन इस घटना के बाद उनको भी अब अपने ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स’ को सुधारने का बड़ा कारण मिल गया होगा. विचार किसी भी विचारधारा के हो, उनको निष्पक्षता के साथ एक दूसरे के समक्ष रखा जाना चाहिए. सार्वजनिक मंचों द्वारा एक ही विचारधारा के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैय्या दुर्भाग्यपूर्ण है.
इस घटना में भारतीय समाज के लिए सीख भी है. हमें यह समझना पड़ेगा कि एक प्लेटफार्म पर इतने भी आश्रित न हो जाएं कि वह हमारी भावनाओं के साथ ऐसा खिलवाड़ कर सके. सोशल मीडिया पर अत्यधिक ‘सोशल’ होना भी अपने आप को कुछ ‘सीईओ’ की टोली के हवाले कर देने जैसा है.
संसदीय समिति का निर्णय कुछ भी हो, लेकिन यह घटना सोशल मीडिया के उपयोक्ताओं और माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट्स, दोनों के लिए ही एक ‘स्ट्राइक’ है.

1 Comment
Hi
Earn second salary from home – even $30k/month.
Super simple to start.
Visit my website to learn more:
https://janzac.com/how-to-start-investing-money-online/