बिहार को बेरोज़गारी का सेंटर आखिर किसने बनाया राहुल जी?

3 फरवरी को राहुल गाँधी ने पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में रैली की. कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने 28 वर्षों बाद अपने दम पर गाँधी मैदान में कोई रैली की है. लेकिन इस रैली ने बिहारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है. बड़ी मुश्किल से बिहार जंगलराज से बाहर निकला है. याद करें तो लालू-राबड़ी राज में बिहार की पहचान खूनी जातीय संघर्ष, नरसंहारों, अपहरण और कत्लेआम के कारण धूमिल हुई थी. उन दिनों भी हर राजनीतिक मुश्किल से लालू यादव को बचाकर जंगलराज बनाने और कायम रखने में कांग्रेस ने लालू यादव की हर तरह से मदद की थी.

इस बार भी बिहार में वापसी को बेकरार कांग्रेस ने ऐसे तत्वों की मदद ली है जो बिहार को बर्बादी के रास्ते पर वापस ले जाने में सक्षम हैं. इस रैली की सारी जिम्मेवारी मोकामा के निर्दलीय विधायक व बाहुबली अनन्त सिंह के जिम्मे थी. अनन्त सिंह पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण जैसे गम्भीर मामलों के दर्जनों मुकदमे दर्ज है. अनन्त सिंह का अपना रसूख है जिसके बल पर वे राहुल गाँधी की रैली में 50 हजार से अधिक की भीड़ जुटाने में सफल भी रहे. 

बिहार में कांग्रेस के 27 विधायक हैं. यदि राहुल अपने प्रत्येक विधायक से 5000 की भीड़ जुटाने को कहते तो गाँधी मैदान में डेढ़ लाख से अधिक की भीड़ जुटा सकते थे. लेकिन राहुल गाँधी ने शॉर्टकट लेना पसंद किया है.

अनंत सिंह एकलौते बाहुबली नही हैं जिनमें राहुल गाँधी सम्भावनाएं टटोल रहे है. बाहुबली पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन राहुल की रैली में गाँधी मैदान में मंच पर मौजूद थीं जबकि गोपालगंज के दलित डीएम जी कृष्णय्या के हत्याकांड में सजा काट रहे बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी भी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं. खबरों के अनुसार वैशाली से लोजपा सांसद और बाहुबली रामा सिंह भी कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं. 

बिहार की रैली में राहुल गाँधी ने बिहार के युवाओं के कुछ न करने की बात कह कर उनका मजाक उड़ाया. बिहार के युवा पूछ रहे हैं कि मौकों के अभाव में बेशक बिहार में काफी लोग बेरोजगार रह जाते हैं लेकिन 50 साल की उम्र में राहुल क्यों बेरोजगार हैं. राहुल गाँधी ने गुजरात और महाराष्ट्र में बिहारियों के उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया लेकिन जहाँ महाराष्ट्र में इस तरह की गुंडागर्दी भाजपा शासन में पूरी तरह बंद है, वहीं गुजरात मे कांग्रेस के उदीयमान नेता ही बिहारियों के उत्पीड़न में शामिल थे. 

बिहार में बिजली, सड़क की हालत अब बेहतर है. पानी की कमी पहले भी नही थी. आज बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है जिसके कारण पलायन आज भी जारी है. नीतीश के 14 वर्षों के शासन में भी बिहार में किसी तरह का उद्योग नही पनप सका है. नीतीश इसे लेकर प्रयासरत भी नही दिखते. ऐसे में बिहार को एक नए नेता और नई नीति की आवश्यकता तो है ही. 

लेकिन क्या बिहार तार से गिरकर खजूर पर लटकेगा? कांग्रेस के पास न नीति दिख रही है और न नेता. अनंत सिंह और पप्पू यादव में बिहार अपना भविष्य देख रहा हो, इसकी संभावना कम ही है. लेकिन कांग्रेस अपने पुनर्जीवन के लिए इन्ही को आशा भरी निगाहों से देख रही है.

कांग्रेस ने पहले भी कई बार लालू यादव के विरोध में वोट मांगकर लालू यादव के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई है. इस बार भी घुड़की भले ही दे, तेवर भले ही दिखाए पर कांग्रेस रहेगी राजद के ही साथ. ऐसे में लगता नही कि बिहार कांग्रेस के झांसे में में आने वाला है.

.

फोटो क्रेडिट

Tags: , ,