भाग – 1 से आगे भारतीय समाज की विशेषता है कि यह अपनी परंपरा और संस्कृति से सदैव जुड़ा रहता है. इस जुड़ाव को तोड़ने के लिये एक नयी चाल
भाग – 1 से आगे भारतीय समाज की विशेषता है कि यह अपनी परंपरा और संस्कृति से सदैव जुड़ा रहता है. इस जुड़ाव को तोड़ने के लिये एक नयी चाल
पिछले कुछ दिनों से चोर-चोर की चिल्लम-चिल्ली बाजार में बहुत मची हुई थी. राजनैतिक रूप से एक दल द्वारा देश के प्रधानमंत्री को अपमानजनक शब्द से सम्बोधित किया जा रहा
समाज वोट देकर सत्ता बनाता है और हटाता है. 2019 एक बार फिर सरकार को दोबारा बनाने या हटाने के अधिकार का वर्ष है. सरकार से भी परे यह निर्णय
राजस्थान में नई सरकार बनी है. ज़ाहिर सी बात है कि कुछ बदलाव अब राज्य में देखा जाएगा. सकारात्मक, या नकारात्मक यह तो समय के गर्भ में छिपा हुआ है.
गाजीपुर का एक दृश्य है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में आरक्षण के लिए रोड जाम कर रखा है. करीमुद्दीन थाने में खबर पहुँची. वहां तैनात थे हेडकांस्टेबल 48 वर्षीय सुरेश
2004 में एनडीए हार चुका था. राजनीति के भीष्म पितामह अटल बिहारी वाजपेयी जैसा विराट व्यक्तित्व राजनीतिक पटल से ओझल होने वाला थे. अपने छह साल से अधिक की सरकार
एक अंग्रेजी हुकूमत का अधिकारी जो बंगाल सिविल सेवा में पास हो कर साल 1849 में ब्रिटिश सरकार का अधिकारी बना था, उसने एक पार्टी का गठन किया, नाम था
2014 का महाभारत युद्ध था. सेनाएं तैयार थी. धर्मराज युधिष्ठिर एक दशक पहले ही युद्ध का मैदान छोड़ चुके थे लेकिन उनके प्रिय शिष्य ने अभी तक गुजरात की गद्दी
आज अटल जी का 94वां जन्मदिन है. उनके देहावसान के बाद ये उनका पहला जन्मदिन है. सशरीर तो वे यहाँ नही हैं लेकिन अपने कृतत्व के माध्यम से सदा ही
सवेरे ट्विटर खोला तो नज़र पड़ी देश की एक दुखदायक घटना पर. एक मोहतरमा को परीक्षा में केवल इसलिए नहीं बैठने दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब पहन रखा था. वैसे