दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
पांच विधानसभाओं के चुनाव परिणामों ने राहुल गांधी और कांग्रेस में एक नई जान फूंक दी है। इससे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की लड़ाई ख़ासी दिलचस्प हो गई
अफवाहों का दौर है. सम्हल कर चलने में ही भलाई है. यह हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज कल अफवाहें किसी वायरल रोग की तरह फैला दी जा रही
“मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा कहा गया है. वे साधारण नानबाई नहीं हैं. वे खानदानी नानबाई हैं. अन्य नानबाई रोटी केवल पकाते हैं, पर मियाँ नसीरुद्दीन अपने पेशे को
पिछले साढ़े चार बरस,जो गये बुरे दिनों को तरस,सुधार लेना अपनी भूल को,और चुन लेना राहुल को। खरबों रुपये के घोटालों को,दामाद, मामा व दलालों को,हर डील पर लटके तालों
एग्जिट पोल के बाद ‘लिख ल्यो’ कहकर चौड़े होने वाले ठंडे पड़ चुके थे. उससे पहले उनकी चुनावी भविष्यवाणी के आत्मविश्वास से चुनाव आयोग भी संशय में पड़ जाता था
‘इयां लागे 5 घण्टे में औरंगज़ेब राज आग्यो” राजस्थान के एक राजपूत पिता ने अपना दुखड़ा पुलिस को सुनाते हुए कहा. उस पिता की बेटी की छाती पर हाथ मारते
देश के तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह अपनी उत्तरी यमन की यात्रा को अधूरा छोड़कर फौरन भारत के लिए रवाना हो चुके थे. दिल्ली पहुँचकर उनकी मंज़िल थी दिल्ली स्थिति
“हम इस प्रक्रिया से संतुष्ट हैं. भारत जैसा देश ऐसे सौदों में देरी नहीं कर सकता. यह भारत के भविष्य के लिए आवश्यक है. सौदे में कुछ भी गलत नहीं
ट्विटर व फेसबुक पर जो बन्धु मंगलवार की सुबह ९ बजे तक हिंदी हार्टलैंड के तीनों प्रदेशों में भाजपा के जीत का दम भर रहे थे, उनमें से कइयों ने