Tag: Akhilesh Yadav

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आजम की नीचता को अखिलेश की मौन स्वीकृति

राजनैतिक मर्यादाओं को ताक कर रखकर राजनेता अपने वोट बैंक को कैसे एड्रेस करते हैं यह किसी से छिपा हुआ नहीं है, लेकिन कल जो आज़म खान ने रामपुर की

समाजवादी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र भी जातिवाद से परे नहीं!

इस देश का यह दुर्भाग्य ही है कि आज़ादी के 70 सालों बाद भी राजनीतिक दल जातिवाद की राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं. एक ओर तो राजनीतिक

भारत में तो अवतरित होते हैं चौकीदार

… गतांक से आगे इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता कि एक जन्म लेने वाले दुधमुंहें बच्चे से लेकर जीवन की अंतिम श्वास लेने वाले वृद्ध तक सभी जीवन

2019 – नरेंद्र मोदी बनाम कुछ नहीं!

सोशल मीडिया के उत्थान और देश भर में स्मार्टफ़ोन की गहरी पैठ के साथ, हिंदी-भाषी क्षेत्र के व्यावहारिक मतदाता खूब भली भाँति जान रहे हैं कि इस बार मोदी के मुक़ाबले कोई नहीं है. वे अब मीडिया की विवादित राफेल कहानी से मूर्ख बनने के लिए तैयार नहीं हैं. वे जानते हैं कि विपक्ष मुखर है, अनाड़ी है और भ्रम से भरा है. मोदी का अर्थ है स्थिरता, और खंडित गठबंधन का मतलब है समझौता, भ्रष्टाचार और फिर एक बार भाई-भतीजावाद वाली सरकार.

अखिलेश यादव को क्या ज़रूरत आन पड़ी हैं छात्र राजनीति में कूदने की?

टीवी चैनलों पर नित नए शोर के बीच कल एख और मुद्दा गर्म था. आरोपों के अनुसार अखिलेश यादव को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में भाग नहीं लेने दिया

गठबंधन को मत कोसिए

देशहित, दलहित या व्यक्ति हित में गठबंधन बनाने की स्वतंत्रता हर राजनीतिक दल को है. विरोधियों द्वारा उसे ‘ठगबंधन’ या ‘लठबंधन’ कहना अलोकतांत्रिक है. गठबंधन बनाने के पावन लोकतांत्रिक कृत्य