पर्यावरण संरक्षण, पितृसत्ता और महिला अधिकार ऐसे शब्द और कार्यक्रम हैं जिनका वामपंथियों द्वारा आज भारतीय परंपरा, संस्कृति के ऊपर शस्त्र के रूप में उपयोग किया जा रहा है. एक
पर्यावरण संरक्षण, पितृसत्ता और महिला अधिकार ऐसे शब्द और कार्यक्रम हैं जिनका वामपंथियों द्वारा आज भारतीय परंपरा, संस्कृति के ऊपर शस्त्र के रूप में उपयोग किया जा रहा है. एक
2019 आम चुनाव का वर्ष है. वैसे तो हर चुनाव ही महत्वपूर्ण होते हैं पर यह चुनाव बहुत ही खास है. देखना दिलचस्प होगा कि 2014 मे मिली जीत को
जून, 1817 की संधि के मुताबिक ही मराठा संघ के ऊपर से पेशवा का नियन्त्रण समाप्त हो गया था. 5 नवम्बर, 1817 के युद्ध मे पेशवा अपनी राजधानी पुणे भी
गाजीपुर का एक दृश्य है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में आरक्षण के लिए रोड जाम कर रखा है. करीमुद्दीन थाने में खबर पहुँची. वहां तैनात थे हेडकांस्टेबल 48 वर्षीय सुरेश
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा.. गुलज़ार का यह शेर समाज की एक बहुत बड़ी समस्या बयान करता हैं. लोगो को यह शिकायत है कि उनके
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनावों में हार पे विवेचना में ब्ज्प आईटी सेल के कार्यो और उपलब्धियों की भी विवेचना होनी चाहिए
पंथ या विचार की सेवा करना सद्कर्म है, स्वयंसेवा के लिए प्रवृत्त होना पुण्य. आइआइटी मुम्बई के छात्र रहे रहे और संप्रति एक कंपनी के सीएमओ अनुराग दीक्षित (@bhootnath) ने
“गणतंत्र दिवस की सभी को शुभकामनाएँ”, एक छोटा सा मेसेज डाल दिया फेसबुक और ट्विटर पे, लाइक, आरटी और “आपको भी” व “धन्यवाद” के बीच कुछ लोगो को अपना प्रोफाइल