Category: विचार

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भारतीय संस्कृति, परंपरा और वामपंथी ढोंग- भाग 1

पर्यावरण संरक्षण, पितृसत्ता और महिला अधिकार ऐसे शब्द और कार्यक्रम हैं जिनका वामपंथियों द्वारा आज भारतीय परंपरा, संस्कृति के ऊपर शस्त्र के रूप में उपयोग किया जा रहा है. एक

कोरेगाँव का जश्न क्यों?

जून, 1817 की संधि के मुताबिक ही मराठा संघ के ऊपर से पेशवा का नियन्त्रण समाप्त हो गया था. 5 नवम्बर, 1817 के युद्ध मे पेशवा अपनी राजधानी पुणे भी

गाजीपुर में पत्थरबाजी और लिबरल चुप्पी

गाजीपुर का एक दृश्य है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में आरक्षण के लिए रोड जाम कर रखा है. करीमुद्दीन थाने में खबर पहुँची. वहां तैनात थे हेडकांस्टेबल 48 वर्षीय सुरेश

अकेले हैं तो क्या ग़म हैं..

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,  क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा..  गुलज़ार का यह शेर समाज की एक बहुत बड़ी समस्या बयान करता हैं. लोगो को यह शिकायत है कि उनके

मोदी फिर एक बार: एक सकारात्मक पहल

पंथ या विचार की सेवा करना सद्कर्म है, स्वयंसेवा के लिए प्रवृत्त होना पुण्य. आइआइटी मुम्बई के छात्र रहे रहे और संप्रति एक कंपनी के सीएमओ अनुराग दीक्षित (@bhootnath) ने

यादों के झरोखे से: गणतंत्र दिवस

“गणतंत्र दिवस की सभी को शुभकामनाएँ”, एक छोटा सा मेसेज डाल दिया फेसबुक और ट्विटर पे, लाइक, आरटी और “आपको भी” व “धन्यवाद” के बीच कुछ लोगो को अपना प्रोफाइल