ये वो समय था जब नरेंद्र मोदी का दौर शुरू नहीं हुआ था. राजनीतिक चर्चाएं भी कांग्रेस और भाजपा के बीच इतनी बंटी हुई नहीं थी. इसी तरह की एक
ये वो समय था जब नरेंद्र मोदी का दौर शुरू नहीं हुआ था. राजनीतिक चर्चाएं भी कांग्रेस और भाजपा के बीच इतनी बंटी हुई नहीं थी. इसी तरह की एक
ठंड हर साल आती है और हर साल हम भारतीयों के कुछ पेटेंट डायलॉग होते हैं: ‘अरे इस बार तो ठंड ही नहीं पड़ रही’ ‘ठंड तो हमारे ज़माने में
जब आपके अपने घर में आग लगी हो तब आप पहले अपने घर की आग बुझाएंगे न कि दूसरे के घरों को बचाएंगे. पर ऐसा ही कुछ केरल में देखने
पिछले कुछ दिनों से चोर-चोर की चिल्लम-चिल्ली बाजार में बहुत मची हुई थी. राजनैतिक रूप से एक दल द्वारा देश के प्रधानमंत्री को अपमानजनक शब्द से सम्बोधित किया जा रहा
नए नवेले 2019 का पहला प्यार भरा लोपक प्रणाम सभी को! देखते देखते एक और साल निकल गया. काफी कुछ नया हुआ, काफी कुछ रह गया. कुछ सिंगल सिंगल ही
अंक 1 से आगे … खिलाफत आंदोलन आरम्भ से ही कमोबेश हास्यास्पद था. हास्यास्पद इस मायने में कि जब भारत के शासन से जुड़े मामलों में भी ब्रिटिश सरकार भारतीयों
राजस्थान में नई सरकार बनी है. ज़ाहिर सी बात है कि कुछ बदलाव अब राज्य में देखा जाएगा. सकारात्मक, या नकारात्मक यह तो समय के गर्भ में छिपा हुआ है.
गाजीपुर का एक दृश्य है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में आरक्षण के लिए रोड जाम कर रखा है. करीमुद्दीन थाने में खबर पहुँची. वहां तैनात थे हेडकांस्टेबल 48 वर्षीय सुरेश
2004 में एनडीए हार चुका था. राजनीति के भीष्म पितामह अटल बिहारी वाजपेयी जैसा विराट व्यक्तित्व राजनीतिक पटल से ओझल होने वाला थे. अपने छह साल से अधिक की सरकार
एक अंग्रेजी हुकूमत का अधिकारी जो बंगाल सिविल सेवा में पास हो कर साल 1849 में ब्रिटिश सरकार का अधिकारी बना था, उसने एक पार्टी का गठन किया, नाम था