लोकतंत्र को ममता से खतरा है

लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ राज्यों में है. इसका कारण है वहां की राज्य सरकारें व उनके द्वारा लिए गए फैसले.

हालिया उदाहरण है पश्चिम बंगाल का. जहां सरकारी तंत्र का उपयोग करके मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक ऐसी फिल्म को बैन कर दिया था जिसमें ऐसा कोई सीन ही नहीं था जो विवादस्पद हो.

हम बात कर रहे हैं बांग्‍ला फिल्‍म ‘भविष्‍योतेर भूत’ की. इस पर पश्चिम बंगाल सरकार ने गत महीने ‘वर्चुअल बैन’  लगा दिया था. इस बैन के विषय में बंगाल प्रशासन की ओर से कहा गया था कि फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है, उससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं. इससे कानून व्यवस्था में समस्या खड़ी हो सकती है.

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से ममता सरकार को करारा झटका दिया गया है.फिल्म ‘भविष्योतेर भूत’ पर ‘वर्चुअल बैन’ लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर 20 लाख रूपये का जुर्माना लगाया है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि 20 लाख रूपये की जुर्माना राशि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी अधिकार के हनन के लिए बतौर मुआवजा फिल्म निर्माताओं तथा सिनेमा हॉल मालिकों को दिया जाना चाहिए.

ज्ञात हो कि बांग्ला फ़िल्म ‘भोविष्योतेर भूत’ राजनीतिक व्यंग्य फिल्म है. इस के रिलीज होने के महज एक दिन बाद ही पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इसे पर्दे से उतरवा दिया था. फिल्म के निर्माताओं ने कोर्ट में कहा था कि टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा सिनेमाघरों के मालिकों को फिल्म पर्दे से हटाने के लिए मजबूर किया गया था.

सनद रहे अनिक दत्ता के निर्देशन में बनी इस फिल्‍म में भूतों का एक समूह एक शरणार्थी शिविर में इकट्ठा होता है और वर्तमान समय में प्रासंगिक होने का प्रयास करता है. इन भूतों में नेता भी शामिल हैं. फिल्‍म 15 फरवरी को प्रदर्शित हुई थी और 16 फरवरी को इसे सिनेमा हॉल से हटा दिया गया था.

इस मामले में गौर करने का विषय यह है कि ममता बनर्जी द्वारा जब इस फ़िल्म पर बैन लगाया गया तो मीडिया गहरी नींद में सोया हुआ था. यदि यही बैन केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया होता तो निश्चित ही अवार्ड वापसी गैंग सड़कों पर कैण्डल मार्च निकाल चुका होता. 

वर्तमान समय में सत्ता का दुरुपयोग करना बहुत ही आसान समझा जाता है. ममता बनर्जी द्वारा केंद्र सरकार पर ‘लोकतंत्र खतरे में है’ को लेकर कई हमले किए जा चुके हैं. लेकिन अब जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंगाल सरकार को दो टूक शब्दों में संविधान के अनुच्छेद 19 का हनन करने के मामले में फटकार लगाई है तो ममता बनर्जी से जवाब देते नही बन रहा.

दूसरों पर आरोप लगाना सरल होता है, इसलिए ममता बनर्जी केंद्र पर लगातार आरोप लगाती रहती हैं, जबकि उन्हें स्वयं के गिरेबां में झांकने की आवश्यकता है.

1 Comment

  1. Jan
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