लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
भारत में 2014 से ही ‘लोकतंत्र ख़तरे में है’ का राग आए दिन अलापा जाता रहा है. वास्तव में यदि किसी देश में लोकतंत्र खतरे में हो तो यह उस देश के लिए अच्छा