बेरोजगार लखपति कन्हैया कुमार

देश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है. हालात इतने बुरे हो गए हैं कि एक बेरोजगार युवक साल में मात्र 2 लाख रुपये ही कमा पता है. हां, सही पढ़ा आपने. एक बेरोजगार व्यक्ति सालाना 2 लाख रुपए ही कमा पाता है. यहां जिक्र हो रहा है स्वयं को गरीब बताने और दिखाने वाले बेरोजगार नेता कन्हैया कुमार का. जो आज गरीबी में जीने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी संपत्ति लगातार बढ़ती जा रही है.

आपको याद तो है न जेएनयू के पूर्व छात्र कन्हैया कुमार के विषय में. यह वही कन्हैया कुमार है जिन पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है. कन्हैया पर आरोप है कि उन्होने देश विरोधी नारे लगाए थे. कन्हैया बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर उम्मीदवार हैं.

गत दिवस कन्हैया ने बेगूसराय के जिला निर्वाचन कार्यालय से अपना नामांकन भी दाखिल किया था. यूं तो नामांकन हर प्रत्याशी दाखिल करता है, लेकिन देशद्रोह के आरोपों से घिरे कन्हैया कुमार के नामांकन के साथ लगे हलफनामे ने कन्हैया की गरीबी व बेरोजगारी का सच सबके सामने ला दिया.

कन्हैया ने हलफनामे में स्वयं को बेरोजगार बताया है, अर्थात उनके पास कोई काम नहीं है. लेकिन उनका बैंक बैलेंस लगातार बढ़ता जा रहा है. कन्हैया कुमार इस वित्तीय वर्ष में अब तक 228290 रुपये की कमाई बेरोजगार होने के बाद भी कर चुके है जबकि पिछले साल कन्हैया की आय 630360 रुपये थी.

कन्हैया के हलफनामे के मुताबिक उसके पास मात्र 24 हजार रुपए कैश है जबकि एक बैंक अकाउंट में 163648 रुपए और दूसरे में 50 रुपए जमा हैं. इसके अतिरिक्त 170150 रुपए की सेविंग्स भी दिखाई गई है.

कन्हैया ने हलफनामे में सोर्स ऑफ इनकम में किताबों व व्याख्यानों से प्राप्त रॉयल्टी का उल्लेख किया है. कन्हैया की बेरोजगारी का आलम यह है कि वह पिछले दो साल ही 8लाख रुपए से अधिक की कमाई कर सके हैं. इस बेरोजगार युवक की स्थिति इतनी दयनीय हो है कि दो सालों में 8 लाख रुपए से अधिक कमाने के बाद भी घर में खाना बनाने के लिए वह गैस का सिलेंडर भी खरीद नहीं सकते.

गौरतलब है कि कन्हैया बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे है. उन्हे महागठबंधन ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उन्हे सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है. बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में कन्हैया का मुकाबला गिरिराज सिंह से है. इस चुनाव में कन्हैया की राह आसान होने वाली नहीं है क्योंकि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भाजपा के कद्दावर नेता हैं.

साथ ही कन्हैया का बेगूसराय के गांवों में जबरदस्त विरोध भी देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार बेगूसराय के कुछ इलाकों में कन्हैया पर कुछ ग्रामीणों ने हमला भी किया था. कई लोग यह मानते हैं कि बेगूसराय में मुख्य मुकाबला भाजपा और राजद के बीच है. कन्हैया लेफ्ट टूरिज्म के प्रतीक मात्र हैं.

ज्ञात हो कि कन्हैया पर देशद्रोह सहित 5 अन्य मुकदमे कायम हैं. एनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगें……’ नारे लगने के बाद कन्हैया रातों-रात चर्चा में आ गए थे. आज वह कई वामपंथी नेताओं के आइकन बने हुए है.

देखना है कि बेगूसराय की जनता विकास के मुद्दे वाली सरकार के पक्ष में गिरिराज सिंह को वोट करती है या फिर उसे जिस पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज है.