लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
लोकतंत्र खतरे में था, है और तब तक रहेगा जब तक राजनीतिक स्वार्थ से हटकर राजनीतिक दल नहीं सोचते. लोकतंत्र को खतरा पूरे भारत में नहीं बल्कि देश के कुछ
विश्व के लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व की घोषणा हो चुकी है. भारत का आम चुनाव लोकतंत्र का महापर्व होता है. आचार संहिता लागू होना इस महापर्व के आरम्भ की