लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए पार्टियों हर तरह के पैंतरे आज़मा रही हैं. इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए पार्टियों हर तरह के पैंतरे आज़मा रही हैं. इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में
जब भी राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात आती है तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर इतने सालों में उन्होंने अमेठी में किया क्या है. स्मृति
इस देश के प्रधानमंत्री को दिन में न जाने कितनी सलाहें मिलती हैं. आज उनको एक और सलाह मिली है. इस बार मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता
आज की राजनैतिक परिस्थितियों को देखते हुए हमें एक बार इतिहास में जाने की आवश्यकता है. क्या होगा, या क्या नहीं होगा, यह तो बाद की बात है. पहले यह
इंग्लैंड में पढ़े नेहरू और उनके परिवार के नेतृत्व में विद्वानों और नौकरशाहों ने राष्ट्र को दिशा निर्देश दिया. आपातकाल का लाभ उठाकर राष्ट्र को सेक्युलर और समाजवादी भी बना दिया. लेकिन फिर भी न तो गरीबी दूर हुई, न ही कृषको को समृद्धि मिली, न ही समाजवाद मिला
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूँ’ के चुनावी अभियान की हुंकार भर के वंशवादी चोरों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और गबन के आरोपों में जमानत पर छूटे नेताओं की नींद
2019 का चुनावी बिगुल बज चुका है. योद्धा मैदान में हैं. काफी कुछ ऐसा है जिसको लेकर अटकलें चल रही हैं. अब मीडिया का बाजार होता ही ऐसा है जहां पर
ये वो समय था जब नरेंद्र मोदी का दौर शुरू नहीं हुआ था. राजनीतिक चर्चाएं भी कांग्रेस और भाजपा के बीच इतनी बंटी हुई नहीं थी. इसी तरह की एक
2004 में एनडीए हार चुका था. राजनीति के भीष्म पितामह अटल बिहारी वाजपेयी जैसा विराट व्यक्तित्व राजनीतिक पटल से ओझल होने वाला थे. अपने छह साल से अधिक की सरकार
एक अंग्रेजी हुकूमत का अधिकारी जो बंगाल सिविल सेवा में पास हो कर साल 1849 में ब्रिटिश सरकार का अधिकारी बना था, उसने एक पार्टी का गठन किया, नाम था