अमेठी-रायबरेली सुना रहे हैं गांधी परिवार की यशगाथा

जब भी राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात आती है तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर इतने सालों में उन्होंने अमेठी में किया क्या है. स्मृति इरानी के आने से पहले उनसे ये सवाल भी नहीं किये गए थे. एक ट्वीट पर मोदी जी को टैग कर देने वाली मीडिया कभी राहुल गांधी से अमेठी के हालात पूछने की हिम्मत नहीं हुई.

अमेठी तो अमेठी पार्लियामेंट में भी राहुल का प्रदर्शन भी भावी प्रधानमंत्री क्या भावी सांसद के लायक भी नहीं है. राहुल गांधी की रैंक 401 लोकसभा सांसदों में 387वे पायदान पर हैं. यही नहीं ट्वीटर पर हर रोज़ सवाल पूछने वाले राहुल गाँधी ने पार्लियामेंट में एक भी सवाल नहीं पूछा है. लोगों के कल्याण की बात करने वाले राहुल गांधी आज तक एक भी प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाए हैं.

अमेठी की हालत देखकर आपको ऐसा एहसास होगा जैसे यहां के लोग सदियों पीछे चले गए हों. अमेठी को विकास की खासकर ज़रूरत है.पर यहां भी राहुल गांधी ने MPLAD फण्ड के 25 करोड़ में से केवल 19.6 करोड़ खर्च किया. अमेठी के घर सड़कें स्कूल अस्पतालों की जो हालात है वह आपको यह बात देगी कि राहुल गाँधी देश चलाने के लायक हैं या नहीं.

राहुल गांधी की पार्लियामेंट में अटेंडेंस भी केवल 52 % है. नीचे से टॉपर आने में राहुल गांधी की माताजी सोनिया जी भी पीछे नहीं हैं. उनकी उपस्थिति 60% है औऱ रैंक 381 है. मीडिया ने कभी सोनिया गांधी आए भी रायबरेली के विकास को लेकर कोई प्रश्न नहीं किया.

इन सब में सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि पार्लियामेंट में या अपने भाषणों में एक भी शब्द बोल देने पर राहुल गांधी को मीडिया ‘आक्रामक’ और ‘प्रधानमंत्री’ बनने के लिए तैयार इत्यादि उपाधियों से नवाज़ देता है. हर एक छोटी कॉन्ट्रोवर्सी पर मोदी की सवाल पूछने वाली यही मीडिया कभी राहुल गांधी से यह नहीं पूछ पाई कि आखिर क्यों उन्होंने अमेठी का विकास नहीं किया. और किस हिसाब से कांग्रेस पार्टी या कोई भी और यह कह सकता है कि वो राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं.

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