1947 में दो देश बने. एक हिंदुस्तान और दूसरा पाकिस्तान. 70 साल बाद आज जब हमारे पूर्वज दोनों देशों को देखेंगे तो समझ में आएगा कि उनसे क्या गलती हुई.
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महाभारत को कुछ दिन ही रह गए हैं. दुर्योधन श्रीकृष्ण से सहायता माँगने द्वारका जा पहुँचा है. उधर जैसे ही पत्रकारों को ख़बर मिली उन्होंने ठान लिया कि ये श्रीकृष्ण
वर्षों पहले माइकल जैक्शन मुम्बई आए थे. आम जनों की छोड़िए, हमारे मुम्बईया सेलेब भी वैसे ही बावले हुए जा रहे थे जैसे उन्हे देखकर हमलोग पगलाते हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के
“का हुआ भेटनर भईया”; हाथ पर लगी पट्टी देखकर चेला टैप लड़के ने पूछा. जबाब मिला; “छुरा लागल बा”. तब बारहवीं में 16 से 19 वर्ष के छात्र हुआ करते
आज आपकी फेसबुक और इंस्टाग्राम की दीवारों पर अगर कुछ दिख रहा होगा तो वो है कपल फोटोज और DIY / Hacks. खाना बनाने से लेकर पैसे बचाने तक के
दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
शीर्षक : गंजहों की गोष्ठी लेखक : साकेत सूर्येश प्रकाशक : नोशन प्रेस कौन हैं ये गंजहे और कहाँ से आते हैं? आख़िर क्यों इन ‘गंजहों की गोष्ठी’ हो रही