इस देश के प्रधानमंत्री को दिन में न जाने कितनी सलाहें मिलती हैं. आज उनको एक और सलाह मिली है. इस बार मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता
इस देश के प्रधानमंत्री को दिन में न जाने कितनी सलाहें मिलती हैं. आज उनको एक और सलाह मिली है. इस बार मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता
अर्जुन ने भ्राताश्री युधिष्ठिर को प्रणाम किया और तपस्या करने के लिए विदा ली. उन्होंने एक स्थान पर बैठकर विकट तपस्या की. धीरे-धीरे उन्होंने भोजन त्याग दिया. उनकी तपस्या से
आज की राजनैतिक परिस्थितियों को देखते हुए हमें एक बार इतिहास में जाने की आवश्यकता है. क्या होगा, या क्या नहीं होगा, यह तो बाद की बात है. पहले यह
इंग्लैंड में पढ़े नेहरू और उनके परिवार के नेतृत्व में विद्वानों और नौकरशाहों ने राष्ट्र को दिशा निर्देश दिया. आपातकाल का लाभ उठाकर राष्ट्र को सेक्युलर और समाजवादी भी बना दिया. लेकिन फिर भी न तो गरीबी दूर हुई, न ही कृषको को समृद्धि मिली, न ही समाजवाद मिला
30 जनवरी, 1948 वह काला दिन है जब शाम के साढ़े पांच बजे महात्मा गाँधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह दिन काला इसलिए भी है कि जहाँ
नेताजी को एक शब्द में परिभाषित करना हो तो वह शब्द होगा- विद्रोह. अन्याय और असमानता के विरुद्ध विद्रोह और संघर्ष ही नेताजी के जीवन का ध्येय रहा. प्रेसिडेंसी कॉलेज
एक अंग्रेजी हुकूमत का अधिकारी जो बंगाल सिविल सेवा में पास हो कर साल 1849 में ब्रिटिश सरकार का अधिकारी बना था, उसने एक पार्टी का गठन किया, नाम था