महाभारत का अनसुना प्रसंग – सइंटिफ़िक टेम्पर

अर्जुन ने भ्राताश्री युधिष्ठिर को प्रणाम किया और तपस्या करने के लिए विदा ली. उन्होंने एक स्थान पर बैठकर विकट तपस्या की. धीरे-धीरे उन्होंने भोजन त्याग दिया. उनकी तपस्या से इतनी ऊर्जा उत्पन्न हुई कि समस्त पृथ्वी पर त्राहि-त्राहि मच गई. अंत में वही हुआ जो पहले से होता आया है. समस्त देवता मिलकर भगवान शिव के पास गए और उन्हें ज्ञापन देते हुए बोले; प्रभु, यदि ऐसा ही चलता रहा तो पृथ्वी का क्या होगा? कुछ कीजिए प्रभु.

भगवान शिव ने किरात का वेष धारण किया और वहाँ जा पहुँचे जहाँ अर्जुन तपस्या कर रहे थे. हठात् अर्जुन के सामने एक सुअर प्रकट हुआ. अर्जुन ने गांडीव उठाया और उसपर तीर छोड़ दिया. ठीक उसी समय किरात ने भी तीर छोड़ा. दोनों के तीर से जानवर मर गया.

अब यह विवाद आरंभ हुआ कि किसके तीर से वह मरा. विवाद गहराया तो किरात और अर्जुन के बीच युद्ध आरंभ हो गया. घोर युद्ध हुआ. किरात ने अर्जुन को पराजित कर दिया.

अपने पराजय से विचलित अर्जुन ने भगवान शिव की आराधना आरंभ की. शिवलिंग पर पुष्प रखकर जब वे मुड़े तो देखते क्या हैं कि वह पुष्प किरात के माथे पर रखा हुआ है. अर्जुन को समझते देर नहीं लगी कि उनके सामने भगवान शिव खड़े थे.

अर्जुन ने आराधना की. भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने अर्जुन को अपना सबसे शक्तिशाली अस्त्र पशुपतास्त्र दिया. अस्त्र देते समय अर्जुन के सामने अस्त्र की विशेषताओं का वर्णन भगवान शिव जैसे-जैसे करते जाते थे, अर्जुन आश्चर्यचकित होते जाते थे. अस्त्र का उपयोग किन परिस्थितियों में करना है, कैसे करना है, उसके क्या परिणाम होंगे, इन सब बातों  का वर्णन कर जब भगवान शिव रुके तब उन्हें प्रतीत हुआ कि अर्जुन के मन में कोई प्रश्न है. उन्होंने ने मुख पर मुस्कान लाते हुए कहा; “वत्स, किंचित तुम्हारे मन में कोई प्रश्न है”

अर्जुन बोले; “हाँ प्रभु, मेरे मन में एक प्रश्न है”

भगवान शिव बोले; “कौन सा प्रश्न?”

“यही कि इस महान अस्त्र को बनाने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली भगवन?”; अर्जुन ने पूछा.

अर्जुन का प्रश्न सुनकर भगवान शिव बोले; “यह प्रश्न त्रेता युग में इंद्रजीत ने भी पूछा था वत्स परंतु मैंने उसे टाल दिया था. आज तुमने पूछा है तो मैं तुम्हें टाल नहीं पा रहा क्योंकि तुम धर्म की रक्षा में इस अस्त्र का प्रयोग करोगे”

अर्जुन बोले; “आपका आभार प्रभु. मैं सुनने के लिए व्याकुल हूँ कि इस अस्त्र को बनाने की प्रेरणा आपको किससे यहाँ कहाँ से मिली?”

भगवान शिव बोले; “तो सुनो वत्स. इस अस्त्र को बनाने की प्रेरणा मुझे नेहरु से मिली. उनके साइयंटिफ़िक टेम्पर ने मुझे यह अस्त्र बनाने के लिए प्रेरित किया”

आकाश में देवतागण ब्रह्मांड के इतने बड़े रहस्य को सुनकर प्रसन्न हुए और उन्होंने पुष्पवर्षा की.

पास से ही देबर्षि नारद जा रहे थे. उन्होंने यह दृश्य देखा और उनके मुँह से बरबस ही निकल आया; नारायण नारायण.


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CA & Blogger @shivkmishr