दृश्य : किसी भी मुद्दे पर..किसी भी चैनल का प्राइम टाइम.. ******************************************* एंकर : हाँ तो ऐसा है..अलाय बलाय..ढिंका चिका…एक दो तीन….अंगूरी बदन…घूंघट में चंदा है..तुनक तुनक तुन तानाना…रा रा
दृश्य : किसी भी मुद्दे पर..किसी भी चैनल का प्राइम टाइम.. ******************************************* एंकर : हाँ तो ऐसा है..अलाय बलाय..ढिंका चिका…एक दो तीन….अंगूरी बदन…घूंघट में चंदा है..तुनक तुनक तुन तानाना…रा रा
सोमनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए हिंदू से इतर अन्य धर्म के लोगों को प्रवेश से पूर्व अपना नाम रजिस्टर में दर्ज कराने का प्रावधान है। राहुल गांधी का नाम
કોંગ્રેસ ના યુવરાજ રાહુલ ગાંધી અને તેમની ગફલતો થી આપણે અજાણ્યા નથી. સોમનાથ મંદિર ના બિનહિંદુઓ માટેના રજિસ્ટરમાં રાહુલ ગાંધીના નામ ની નોંધણી ના વિવાદથી રાજકારણમાં ધર્મની ભૂમિકા ચર્ચા નો
पूरी दुनियाँ में शायद ही कोई देश हो, जहाँ घटनाक्रम उतनी तेजी से बदलते हों, जितनी तेजी से पकिस्तान में बदलते हैं. मजे की बात यह है कि ऐसा दशकों
पाँच गावों की डिमांड ठुकरा दिए जाने के बाद केशव वापस जा चुके हैं। पितामह, कृपाचार्य, महात्मा विदुर और गुरु द्रोण अनिष्ट की आशंका से ग्रस्त हो चुके हैं। दिनकर
हर साल की तरह इस साल भी २ अक्टूबर आ ही गया. हर साल की तरह इस साल भी भाषणों की झड़ी लगेगी, टीवी पर गाँधी फिल्म दिखाई जाएगी, रेडिओ
भारत एक चुनाव प्रधान देश है. एक चुनाव जाता नहीं कि दूसरा आ धमकता है. जल्दी-जल्दी चुनाव होने के अनेक फायदे हैं. इससे लोकतंत्र में जड़ता नहीं आती. मतदाता खुद
गांधी से कहके हम तो भागे, कदम टिकते नहीं साहब के आगे रंज लीडर को बहुत है मगर हार के बाद कुछ ऐसा ही हुआ महसूस हुआ रिकार्ड तोड़ जुमलों,
आज आपको एक कहानी सुनाता हूँ। बहुत पहले जंगल में लोकतंत्र की स्थापना हुई। उसी जंगल में एक खलीलाबाद नाम का उपवन था। उस उपवन में गधों की आबादीचालीस फीसदी
मेढ़कों को तराजू के दो पलड़ों पर रखकर आप भले ही तौल लें पर चुनावी मौसम में माननीयों का लोकतंत्रीय उछल-कूद (मने दलबदल) रोकना लगभग असंभव है. माननीयों के उछल-कूद