Category: हास्य व्यंग्य

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न्यू ईयर रिजॉल्यूशन

आठ पहरिया चैनल के एंकर भयंकर, अखबारों के स्थापित स्तंभकार व मूर्धन्य ट्विटकार पूरे साल के घटनाक्रम को हमारे सामने ‘गागर में सागर’ टैप परोसकर कैलेंडर से बेहतर यह बता

फिर एक क्रांति

दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन

पिछले साढ़े चार बरस का हाल

पिछले साढ़े चार बरस,जो गये बुरे दिनों को तरस,सुधार लेना अपनी भूल को,और चुन लेना राहुल को। खरबों रुपये के घोटालों को,दामाद, मामा व दलालों को,हर डील पर लटके तालों

चुनाव परिणामों पर प्रहसन

एग्जिट पोल के बाद ‘लिख ल्यो’ कहकर चौड़े होने वाले ठंडे पड़ चुके थे. उससे पहले उनकी चुनावी भविष्यवाणी के आत्मविश्वास से चुनाव आयोग भी संशय में पड़ जाता था

कॉमरेड केसरिया

यह कहानी उस दौर की है जब लडकियाँ ‘बोल्ड और साइज़ ज़ीरो’ नहीं, शर्मीली और गदराई होती थीं. उनका जीन्स से वास्ता नहीं था और दुपट्टे को वे अनिवार्य समझती