“का हुआ भेटनर भईया”; हाथ पर लगी पट्टी देखकर चेला टैप लड़के ने पूछा. जबाब मिला; “छुरा लागल बा”. तब बारहवीं में 16 से 19 वर्ष के छात्र हुआ करते
“का हुआ भेटनर भईया”; हाथ पर लगी पट्टी देखकर चेला टैप लड़के ने पूछा. जबाब मिला; “छुरा लागल बा”. तब बारहवीं में 16 से 19 वर्ष के छात्र हुआ करते
ठंड हर साल आती है और हर साल हम भारतीयों के कुछ पेटेंट डायलॉग होते हैं: ‘अरे इस बार तो ठंड ही नहीं पड़ रही’ ‘ठंड तो हमारे ज़माने में
आठ पहरिया चैनल के एंकर भयंकर, अखबारों के स्थापित स्तंभकार व मूर्धन्य ट्विटकार पूरे साल के घटनाक्रम को हमारे सामने ‘गागर में सागर’ टैप परोसकर कैलेंडर से बेहतर यह बता
आज आपकी फेसबुक और इंस्टाग्राम की दीवारों पर अगर कुछ दिख रहा होगा तो वो है कपल फोटोज और DIY / Hacks. खाना बनाने से लेकर पैसे बचाने तक के
दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
पिछले साढ़े चार बरस,जो गये बुरे दिनों को तरस,सुधार लेना अपनी भूल को,और चुन लेना राहुल को। खरबों रुपये के घोटालों को,दामाद, मामा व दलालों को,हर डील पर लटके तालों
एग्जिट पोल के बाद ‘लिख ल्यो’ कहकर चौड़े होने वाले ठंडे पड़ चुके थे. उससे पहले उनकी चुनावी भविष्यवाणी के आत्मविश्वास से चुनाव आयोग भी संशय में पड़ जाता था
दिल्ली सरकार ठंड का महीना आते ही अब तक तो केवल आपके गाड़ी के आरामदायक सफर पर ही नज़र गड़ाए बैठी होती थी पर अब उनकी नज़र शादी में आपकी
कॉलोनी बनने के समय से एक दद्दू यहाँ रहते हैं. आज से 15 साल पहले भी दद्दू साठ वर्ष के दिखते थे, आज भी 60 वर्ष के ही लगते हैं.
यह कहानी उस दौर की है जब लडकियाँ ‘बोल्ड और साइज़ ज़ीरो’ नहीं, शर्मीली और गदराई होती थीं. उनका जीन्स से वास्ता नहीं था और दुपट्टे को वे अनिवार्य समझती