2019 का चुनावी बिगुल बज चुका है. योद्धा मैदान में हैं. काफी कुछ ऐसा है जिसको लेकर अटकलें चल रही हैं. अब मीडिया का बाजार होता ही ऐसा है जहां पर
2019 का चुनावी बिगुल बज चुका है. योद्धा मैदान में हैं. काफी कुछ ऐसा है जिसको लेकर अटकलें चल रही हैं. अब मीडिया का बाजार होता ही ऐसा है जहां पर
हाशिये पर खड़े बिस्कुट वाले चैनल से क्रांतिकारी पत्रकार की छुट्टी कर दी गई है. इसके बाद से ही फेसबुक और ट्विटर पर क्रांतिकारी श्रेणी के पत्रकार गण पिछले पाँच
2014 के बाद से ही लगभग सभी जर्नलिस्टों ने एक बात पर गांठ बांध ली थी कि सोशल मीडिया पर कुछ गलत हो रहा है तो वह केवल एक संघी
राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है, न तेवर और न कलेवर एवं न मित्र और न शत्रु. भारत की राजनीति में इस समय यह रंग में दिख रहा
आज देश को नया लोकपाल मिल गया है. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी,
भारत में 2014 से ही ‘लोकतंत्र ख़तरे में है’ का राग आए दिन अलापा जाता रहा है. वास्तव में यदि किसी देश में लोकतंत्र खतरे में हो तो यह उस देश के लिए अच्छा
पिछले कुछ वर्षों से कुछ चलन ऐसे बन गए हैं जो एक नज़र में शायद सही लगे पर अंततः केवल दोहरे पैमाने वाली औपचारिकता मात्र रह जाते हैं. जैसे एक
मुकेश अंबानी ने अपने छोटे भाई अनिल अंबानी को जेल में जाने से रोक लिया है. उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशन द्वारा सोनी एरिक्सन को दिए जाने वाले 453 करोड़ रुपयों को
कम्युनिस्ट तानाशाह निकोलाइ चाउसेस्क्यू ने सन 1965 से यूरोप के देश रोमानिया में शासन किया. 1989 में पोलैंड, पूर्वी जर्मनी (उस समय यह एक अलग देश था), हंगरी, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया
सोशल मीडिया के उत्थान और देश भर में स्मार्टफ़ोन की गहरी पैठ के साथ, हिंदी-भाषी क्षेत्र के व्यावहारिक मतदाता खूब भली भाँति जान रहे हैं कि इस बार मोदी के मुक़ाबले कोई नहीं है. वे अब मीडिया की विवादित राफेल कहानी से मूर्ख बनने के लिए तैयार नहीं हैं. वे जानते हैं कि विपक्ष मुखर है, अनाड़ी है और भ्रम से भरा है. मोदी का अर्थ है स्थिरता, और खंडित गठबंधन का मतलब है समझौता, भ्रष्टाचार और फिर एक बार भाई-भतीजावाद वाली सरकार.