दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
दौर ऐसा था कि लाइसेंस परमिट राज पूरा गया नहीं था, उदारवाद उमड़कर आया नहीं था. साम्यवाद अभी सरका नहीं था, राष्ट्रवाद पूरा भड़का नहीं था. सदाबहार समाजवाद सौ दिन
राधिका की तेज़ कर्कश आवाज़ से सब सहम गये. बड़ी उद्दंडता से एक लोहे के ट्रंक में चार जोड़ी धोतियाँ भरकर वह सामने पटक गई. पाँव पटकती हुई बोली कि
मैं फ़्रैंकफ़र्ट एअरपोर्ट पर मक्खन से लबरेज़ प्रेट्ज्ल चबाते हुए, गरमागरम कॉफ़ी सुड़कते हुए रूई की मानिंद गिरती हुई बर्फ़ का नज़ारा ले रहा था कि कानों में आवाज़ पड़ी
पाकिस्तान बनने के लगभग 6 माह बाद मोहम्मद अली जिन्ना पूर्वी पाकिस्तान की राजधानी ढाका आये। 21 मार्च, 1948 को उन्होंने ढाका के रमना रेस कोर्स मैदान में एक विशाल
ऑफिस के वाशरूम में शीशे के सामने खड़ी प्राउड वाली मुस्कुराहट के साथ झुर्रियों वाले गाल ब्लश से चमकाती हुई सीईओ हो या कॉम्पलेक्स प्रोजेक्ट की तरह बालों की उलझन
अंतिम लड़ाई का बिगुल फूँक दिया गया था. जस्टिस खेहर ने कहा कि हम 5 दिसंबर को यह मामला सुनेंगे. 5 दिसंबर को क्या हुआ, 2 मिनट में क्या निर्णय
गतांक से आगे … ताला खुलवाने की लड़ाई जीती जा चुकी थी. अब संघर्ष कानूनी रुप से यह सिद्ध करने का था कि वहाँ एक मंदिर पहले से ही था.
लोपक प्रणाम दोस्तो, ये चिट्ठी आप सबके नाम है. बिना लाग लपेट के आपके सामने अपनी बात रखते हैं. तो बात ये है कि हम सब देख ही रहे हैं
अयोध्या का अर्थ है जिससे युद्ध जीता न जा सके। लेकिन अयोध्या के इस अर्थ पर प्रश्नचिन्ह लगाते तीन गुम्बद वहाँ खड़े थे जिन्हें आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व
यह पूरी कहानी शुरू होती है पानीपत के युद्ध के बाद 1528 ई० में जब बाबर के सेनापति ने अयोध्या की उस जमीन पर बने मंदिर को तोपों से उड़ा