अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी सभी इदारे मिले हुए है, जनरैल सारे खिले हुए हैं ख़ुशी दिखे इमरान तुम्हारी ऐसी-तैसी अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी मीडिया भांड के माफ़िक़ नाचें, जम्हूरियत के
अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी सभी इदारे मिले हुए है, जनरैल सारे खिले हुए हैं ख़ुशी दिखे इमरान तुम्हारी ऐसी-तैसी अजब-ग़ज़ब मतदान तुम्हारी ऐसी-तैसी मीडिया भांड के माफ़िक़ नाचें, जम्हूरियत के
रात का समय. आकाश मार्ग से जाती हुई मेनका, रम्भा, सहजन्या और चित्रलेखा पृथ्वी को देखकर आश्चर्यचकित हैं. उन्हें आश्चर्य इस बात का है कि मुंबई के साथ-साथ और भी
फिर चुनाव सब, वही दाँव सब, कहीं हाथ तो, कहीं पाँव सब, इधर हवा तो, उधर है आँधी, इधर अमित शा, उधर हैं गांधी, है कालप्पा, औ येदुरप्पा, रक्षा करिए,
कुरुक्षेत्र में बने योद्धाओं के कक्ष। पितामह के आगे धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम और वासुदेव कृष्ण उदास बैठे हैं। पितामह उनको बता चुके हैं कि शिखंडी को आगे रखकर उन्हें
किस काल में कौन सी चीज समाज का दर्पण हो, यह उस काल के समाज पर निर्भर करता है। प्राइमरी या मिडिल स्कूल के विद्यार्थी के लिए पहले साहित्य समाज
यह निबंध नहीं बल्कि कलकत्ते में रहने वाले एक युवा, बापी दास का पत्र है जो उसने इंग्लैंड में रहने वाले अपने एक नेट-फ्रेंड को लिखा था. इंटरनेट सिक्यूरिटी में
वर्षों तक रण में हार-हार, तजकर निज गरिमा बार-बार, युवराज पुनः तैयार हुआ, फिर नव-रण का आगार हुआ, सौभाग्य न सब दिन सोता है, जो रटे यही वह तोता है,
पूरी दुनियाँ में शायद ही कोई देश हो, जहाँ घटनाक्रम उतनी तेजी से बदलते हों, जितनी तेजी से पकिस्तान में बदलते हैं. मजे की बात यह है कि ऐसा दशकों
पाँच गावों की डिमांड ठुकरा दिए जाने के बाद केशव वापस जा चुके हैं। पितामह, कृपाचार्य, महात्मा विदुर और गुरु द्रोण अनिष्ट की आशंका से ग्रस्त हो चुके हैं। दिनकर
“हस्तिनापुर टाइम्स, हस्तिनापुर एक्सप्रेस हस्तिनापुर टूडे और टाइम्स ओफ हस्तिनापुर, सब बदनाम हो गए हैं जीजाश्री। अब इनकी न तो ख़बरें पढ़ी जाती हैं और न ही संपादकीय। अब जब