Mukul Mishra

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आडवाणी जी को लोपक प्रणाम!

आडवाणी जी का जीवन सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए अनुकरणीय है. उनके लिए भी जो उनसे वैचारिक सहमति रखते हैं और उनके लिए भी जो असहमति रखते हैं. 91 वर्ष की उम्र में भी वे सक्रिय हैं, स्वस्थ हैं. कभी विचारधारा से समझौता नही किया. चालू राजनीति के हिसाब से खुद को ढालने की जगह राजनीति को ही अपनी विचारधारा के हिसाब से बदल दिया. व्यक्तिगत जीवन मे भी उच्च आदर्शों का पालन किया. कभी भ्रष्टाचार से समझौता नही किया. लाखों कार्यकर्ता और सैकड़ों नेताओं को राजनीति के लिए तैयार किया. परिवारवाद से दूर रहे. लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति में हमेशा मील के पत्थर रहेंगे.

नौकरी करनी आती नहीं पर बिल मोदी के नाम फाड़ दो!

हाशिये पर खड़े बिस्कुट वाले चैनल से क्रांतिकारी पत्रकार की छुट्टी कर दी गई है. इसके बाद से ही फेसबुक और ट्विटर पर क्रांतिकारी श्रेणी के पत्रकार गण पिछले पाँच

लोपक प्रणाम, मनोहर भाई!

देश के पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर का निधन राजनीति की उस धारा के लिए अपूरणीय क्षति है जिसमें न व्यक्तिगत महत्वकांक्षा के लिए स्थान

सदगुरु से आप इतना क्यों चिढ़ते हैं लिबरल जी?

प्रख्यात धर्मगुरु सदगुरू जग्गी वासुदेव ने हाल में एक टाइम्स नाउ चैनल को  साक्षात्कार दिया है. एक प्रश्न के उत्तर में सदगुरू ने कहा कि कानून के अनुसार जेएनयू के

लड़ाई गजवा-ए-हिन्द की है, कश्मीर की नहीं

पाकिस्तान से जो लड़ाई हम लड़ रहे हैं, वह कश्मीर की लड़ाई नही है. पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद ही कश्मीर को पाने की उम्मीद छोड़ दी थी.

अभिनन्दन हो राष्ट्र के नंदन का

हिंदुस्तान की सामरिक शक्ति और राजनयिक सूझबूझ के सामने जिस तरह पाकिस्तान अकेला और कमजोर पड़ा है, उसी का नतीजा है कि उसने महज दो दिन में ही हमारे बहादुर

ये शांति की पुकार डर की उपज है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तानी टीवी पर बैठकर यह उपदेश दिया है कि शांति और बातचीत से ही मसले हल होने चाहिए. उन्होंने कहा है कि भारत और

कड़ी निंदा से कह के मारने तक का सफर

भारतीय वायुसेना के 12 ‘मिराज 2000’ लड़ाकू जहाजों ने पाक अधिकृत कश्मीर में प्रवेश कर हजार-हजार किलो के बम बरसाये हैं. ANI के हवाले से आई खबर के अनुसार बालाकोट,

कश्मीर समस्या का हल क्या है?

चीन के किसी डिप्लोमैट ने भारतीय डिप्लोमेसी का मजाक उड़ाते हुए कभी कहा था; “वे (भारतीय) किसी मुद्दे पर बात करते हैं और फिर बात करते हैं और फिर बात