कड़ी निंदा से कह के मारने तक का सफर

भारतीय वायुसेना के 12 ‘मिराज 2000’ लड़ाकू जहाजों ने पाक अधिकृत कश्मीर में प्रवेश कर हजार-हजार किलो के बम बरसाये हैं. ANI के हवाले से आई खबर के अनुसार बालाकोट, चकोठी और मुजफ्फराबाद के आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. इस हमले में मरने वाले आतंकियों की संख्या 300 के ऊपर हो सकती है.

1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल को क्रॉस किया है. सबसे पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने सुबह सुबह ट्वीट कर यह स्वीकार किया कि भारत की वायुसेना ने सीमा का उल्लंघन कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बम गिराए हैं. हालांकि पाकिस्तानी सेना अभी तक किसी भी तरह की क्षति से इंकार कर रही है. जाहिर है पाक फौज के लिए ऐसी बात स्वीकार करना आसान नही रहने वाला है.

याद करें तो उड़ी हमले के बाद जिस तरह भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकी ठिकानों को उड़ाया था और उड़ी का बदला लिया था उसके बाद से ही यह लग रहा था कि आतंकी हमलों और पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ को लेकर भारत की नीति में बदलाव आया है. आज का एयर सर्जिकल स्ट्राइक इस बदलाव पर पक्की मुहर लगाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा हमले के ठीक बाद कहा था कि पुलवामा हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा. ये नया हिन्दुस्तान है जो चोट खा कर चुप नही रहेगा, ईंट का जवाब पत्थर से देगा.

इस हवाई हमले की सफलता से यह भी साबित होता है कि भारतीय सुरक्षाबल सही योजना बनाकर पाकिस्तान को जवाब देने में सक्षम हैं. उड़ी हमले के बाद भी भारतीय सेना बिना किसी क्षति के आतंकियों के कैम्प उड़ाकर वापस आने में सफल रही थी. आज के हवाई हमले में भारतीय वायुसेना बिना किसी नुकसान के आतंकी कैम्पों को तबाह करने में सफल रही. इस सफलता से जहाँ भारतीय सेना का मनोबल आसमान छू रहा होगा वहीं पाकिस्तान सेना का आत्मविश्वास डोल रहा होगा.

इस हवाई हमले का पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में भी प्रभाव पड़ेगा. पाकिस्तानी सेना हिन्दुस्तान का डर दिखा कर ही पाकिस्तान पर अधिकार बनाये रखती है और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकारों को जूती के नोक पर रखती है. लेकिन इन हमलों के बाद पाकिस्तान के भीतर भी लोग पूछेंगे कि पेट काटकर पाकिस्तानी सेना को बेहिसाब बजट देने का क्या फायदा जब हिंदुस्तान कभी भी अपनी मर्जी से पाकिस्तान पर हमला कर सकता है और बड़े आराम से वापस भी लौट सकता है.

इन हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना पर जबरदस्त दबाव होगा. नवाज शरीफ से लेकर जरदारी तक राजनीति में पाकिस्तान के दखल से परेशान हैं. ऐसे में पाकिस्तानी सेना को अब आलोचना झेलने के लिए तैयार रहना होगा.

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या पाकिस्तानी सेना इस हमले का जवाब देगी और भारत पर ऐसे ही हवाई हमले का प्रयास करेगी? पाकिस्तान के अंदर अभी जिस तरह के हालात हैं और पाकिस्तान जितना अंतरराष्ट्रीय दबाव है उसमें लगता नही की पाकिस्तान जवाबी हमले की हिम्मत कर सकेगा. लेकिन पाकिस्तान पर अंदरूनी दबाव बहुत अधिक होगा. यदि वह इस हमले का जवाब देता है तो ऐसे और भी हमले झेलने होंगे और अगर वह जवाब नही दे पाता है तो पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीति में पाक सेना की स्थिति कमजोर होगी.

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