ताशकंद फाइल्स: रहस्य और षडयंत्र

रविवार की एक दोपहर मेरे पिता ने मुझे यह फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया. साफ-साफ कहूँ तो इस फिल्म से मेरी अपेक्षाएं अधिक नहीं थी लेकिन फिल्म देखकर मैं खिल उठा. इस फिल्म देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और उनकी रहस्यमय मृत्यु पर नये आयाम खोले. यह बच्चों को शास्त्री जी के बारे में और पढ़ने को प्रेरित करेगा जिससे उन्हे शास्त्री जी के जीवन के और उसे विद्यालयों में कैसे पढ़ाया जाता है, के बारे में जानकारी मिलेगी. मुझे लगता है कि इस फिल्म को देखने वाले बहुत लोग ऐसे होंगे जो शास्त्री जी के बारे में अधिक नहीं जानते. ऐसे दर्शकों का इस फिल्म को देखते हुए ज्ञानवर्द्धन होगा.

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु के षडयंत्र पर आधारित यह फिल्म अपने आप में अनूठी है. यह उन गिनी चुनी फिल्मों में से है जिसने ऐसे षडयंत्र का पर्दाफाश करने की हिम्मत दिखायी है. यह फिल्म बेहतर समीक्षा डिजर्व करती है. फिल्मोद्योग से लुप्तप्राय ऐसी साहसिकता के लिए फिल्म के निर्देशक की भूरि भूरि प्रशंसा होनी चाहिए. हालांकि यह फिल्म शानदार है पर मेरी अपेक्षा थी कि इसने कुछ और राज खोले होते.

एक महत्वपूर्ण बात जो फिल्म में छोड़ दी गयी, वह है फिल्म के अंत में इन्दिरा गांधी का नाम छिपाना क्योंकि स्क्रीन पर मित्रोखिन आर्काइव दिखाए जाने से ठीक पहले यह किताब में दिखा था. फिर भी इसे नजरअंदाज किया जा सकता है क्योंकि अन्य तत्व इस कमी की भरपाई कर देते हैं.

यह फिल्म चित्रित करती है कि सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है यदि लक्ष्य पाने के लिए कठिन परिश्रम किया जाए. अपने कथ्य के कारण इस फिल्म में बहुत देरी हो सकती थी लेकिन सौभाग्य से इसकी राह में बाधाएं नहीं आईं. कुल मिलाकर यह बेहद अच्छी फिल्म है जिसमें ड्रामा और एक्शन दर्शकों पर प्रभावी असर छोड़ते हैं.

यह फिल्म अधिक प्रशंसा इसलिए डिजर्व करती है क्योंकि इसकी एक पूर्व कथा है, जिसे अधिकतर लोग नजरअंदाज करते हैं. इस फिल्म को देखने बाद मैं किताबों, जीवनियों, षडयंत्रों और अन्य किताबों को पढ़ने के लिए प्रेरित हुआ हूँ जिससे मेरे समक्ष व्यक्तित्वों और घटनाओं के नये आयाम खुलें. मैं आप सबसे अपने निकट के सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने की अनुशंसा करता हूँ. यह फिल्म देखने लायक है.