रविवार की एक दोपहर मेरे पिता ने मुझे यह फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया. साफ-साफ कहूँ तो इस फिल्म से मेरी अपेक्षाएं अधिक नहीं थी लेकिन फिल्म देखकर मैं खिल
रविवार की एक दोपहर मेरे पिता ने मुझे यह फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया. साफ-साफ कहूँ तो इस फिल्म से मेरी अपेक्षाएं अधिक नहीं थी लेकिन फिल्म देखकर मैं खिल
विवेक ओबराय ने राजदीप से पूछा; “क्या आपके शो को बंद कर देना चाहिए क्योंकि वह लोगों की सोच को प्रभावित करता है?” कुछ वर्ष पहले जब ठीक पंजाब चुनाव