कैसे कैसे लोगों को कांग्रेस दे रही टिकट

देश की सबसे पुरानी पार्टी के रूप में पहचानी जाने वाली पार्टी कांग्रेस की पिछले लोकसभा चुनाव में बुरी हार हुई थी. यह हार इतनी बड़ी थी कि भाजपा की जीत से अधिक कांग्रेस की हार के चर्चे हो रहे थे. उस हार के बाद से राजनीतिक हल्कों में कांग्रेस को ‘डूबता जहाज़’ कहना आम हो गया है.

लेकिन क्या कांग्रेस वास्तव में डूबना चाहती है? यह प्रश्न तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब पार्टी के दिग्गज नेताओं द्वारा ऊलजलूल बयान बाजी की जाती है. लेकिन एक और विषय है जो राजनीतिक विशेषज्ञों के गले से नहीं उतर रहा है. यह विषय है लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन का. 

कांग्रेस द्वारा ऐसे उम्मीदवार घोषित किए जा रहे हैं, जिन पर गंभीर आरोप हैं. पिछले महीने जब पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ती चिदंबरम को तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से टिकट दिया गया था, तब मीडिया सहित राजनीति के तमाम जानकरों ने हज़ारों प्रश्न खड़े किए थे.

लेकिन उससे सीख न लेते हुए कांग्रेस ने ऐसे अनेक प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जिन पर भ्रष्टाचार समेत धोखाधड़ी के आरोप हैं. ऐसा ही एक वाकया सामने आया है मध्यप्रदेश के भिंड लोकसभा क्षेत्र से, जहाँ कांग्रेस ने देवाशीष जरारिया को प्रत्याशी बनाया है.

ज्ञात हो कि जरारिया को बीएसपी यूथ की एक फ़र्ज़ी वेबसाइट चलाते हुए पकड़ा गया था. जररिया बीएसपी के प्रवक्ता के रूप में टीवी डिबेट में भी सम्मिलित होता था.

इस प्रकरण के सामने आने के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी मीडिया से कहा था कि देवाशीष जरारिया बसपा यूथ के नाम से एक वेबसाइट चला रहा है, जिसमें वह खुद को बसपा के सदस्य के रूप में बता रहा है. फेसबुक पेज पर वह युवाओं को पार्टी में शामिल करने का प्रयास कर रहा है, साथ ही वह उनसे शुल्क भी ले रहा है.

मायावती के इस बयान के बाद देवाशीष जरारिया का खेल खत्म हो चुका था. वह अब बीएसपी के नाम पर पैसे नहीं ऐंठ सकता था. ऐसे में उसने कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. हालांकि इस मुद्दे पर मीडिया में अधिक चर्चा नहीं हुई.

लेकिन पिछले महीने जरारिया एक बार फिर तब चर्चा में आया जब उसने पुलवामा हमले के एक दिन बाद 15 फरवरी को हमले के विषय में एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में जरारिया ने एक स्क्रीनशॉट के विषय में लिखा था जो 2 दिन पूर्व का था. उस स्क्रीन शॉट पर कश्मीर के विषय में भाजपा पर आरोप लगाया गया था.

यहां यह जानना आवश्यक है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के 50 से अधिक ठिकानों पर आयकर विभाग द्वारा की गई ताजा छापेमारी में भी जरारिया का नाम सामने आया था.

रिपोर्ट्स के अनुसार आयकर विभाग के एक नोट में खुलासा हुआ है कि कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के करीबी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के आवास पर कथित तौर पर बेहिसाब नकदी रखी गई थी.

इस नकदी का उपयोग लोकसभा चुनावों में भुगतान करने के लिए पार्टी नेताओं को एक हवाला रैकेट के माध्यम से किया गया था. सूची में 11 वरिष्ठ सहित प्रमुख कांग्रेस नेताओं का उल्लेख किया गया है जिन्होंने कथित रूप से नकद भुगतान प्राप्त किया है. रिपोर्ट्स में जरारिया का नाम 25 लाख रुपये के लेन-देन की सूची में है. 

मतलब जिस पर एक नहीं दो नहीं तीन-तीन आरोप हों, उसे कांग्रेस ने टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस के पास महेंद्र सिंह बौद्ध व महेंद्र जाटव जैसे दो मज़बूत दावेदार सामने थे. कांग्रेस द्वारा इस प्रकार के टिकट बंटवारे से अच्छे कार्यकर्ता व नेताओं का मनोबल कमज़ोर होता है, साथ ही कांग्रेस की हक़ीक़त भी जनता के सामने आ रही है.

बहरहाल, अब महत्वपूर्ण यह है कि भिंड के मतदाता किस प्रत्याशी का चुनाव करते हैं. यहां बड़े आरोपों से घिरे देवाशीष जरारिया का सीधा मुकाबला भाजपा की साफ सुथरी छवि वाली महिला प्रत्याशी संध्या राय से है, जो मज़बूत प्रत्याशी बताई जा रही हैं.