कर्नाटक में लोकतंत्र खतरे में है!

भारत में 2014 से ही ‘लोकतंत्र ख़तरे में है’ का राग आए दिन अलापा जाता रहा है. वास्तव में यदि किसी देश में लोकतंत्र खतरे में हो तो यह उस देश के लिए अच्छा नहीं है. सोमवार को बैंगलोर में जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं था. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, इसी सिलसिले में वो इन दिनों कर्नाटक की यात्रा पर हैं. जहां उन्हें बैंगलोर स्थित मान्यता टेक पार्क में टेक्नीशियन्स के साथ वार्तालाप करना था.

यहाँ ‘प्रशासन’ द्वारा राहुल के स्वागत के लिए भरपूर तैयारियां की गईं थीं. राहुल भी आजकल जोश में दिख रहे हैं तो लगा कि बैंगलोर में कुछ ऐसा बोलेंगें कि भूकंप आ जाए, पर होनी को कुछ और मंज़ूर था.

मान्यता टेक पार्क में उपस्थित सैकड़ों टैक्नीशियन्स ने राहुल के’स्वागत’ में मोदी मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए. ये टेक्नीशियन्स यहीं नहीं रुके, इन लोगों ने ‘मोदी-मोदी के नारे लगाते हुए हाथों में पोस्टर उठा लिए जिनमें राहुल गांधी से कार्यक्रम स्थल छोड़ने को कहा गया था. नारे लगातार लग रहे थे जिसके कारण राहुल व कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही थी. इस शर्मिंदगी से बौखलाए हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता नारेबाजी करने वाले टैक्नीशियन्स के साथ मारपीट पर उतारू हो गए. जब यह मारपीट का सिलसिला शुरू हुआ तो लगा कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद पुलिस निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेगी, लेकिन हुआ इसके विपरीत.

यहाँ मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप करने के बजाय नारेबाजी कर रहे टैक्नीशियन्स पर ही लाठीचार्ज कर दी. हैरत की बात यह थी कि टैक्नीशियन्स ने केवल नारेबाजी की, न तो कोई कानून तोड़ा न ही कानून व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की. लेकिन कर्नाटक सरकार की पुलिस ने अपना रौब जताते हुए लाठीचार्ज की. इस संबंध में खबर यह भी है कि नारे लगा रहे कुछ टेक्नीशियन्स को कर्नाटक पुलिस गिरफ़्तार भी किया गया था.

टेक्निशियन्स पर हुए इस हमले व कर्नाटक पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार का भाजपा द्वारा विरोध किया गया. इसी मुद्दे पर भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा टेक्नीशियन्स पर हमला किया गया है.

यह हमला तब किया गया जबकि राहुल गांधी मान्यता टेक पार्क में मौजूद थे. साथ ही प्रदेश महासचिव ने लिखा राहुल गांधी जिनके पिता ने दिल्ली में 3000 से सिखों की ‘लिंचिंग’ का आदेश दिया था, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है.

कांग्रेस व अन्य विरोधी दलों द्वारा सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी से लेकर इन्टॉलरेंस व ‘लोकतंत्र खतरे में है’ तक का आरोप लगाया जाता रहा है. लेकिन अब जबकि अभिव्यक्ति की आजादी का उपयोग टेक्नीशियन्स के इस समूह ने किया तो उन पर लाठीचार्ज व गिरफ्तारी कर कांग्रेस की कर्नाटक सरकार व पुलिस द्वारा लोकतंत्र की हत्या नहीं तो और क्या है?

पुलिस राज्य सरकार के नीचे ही काम करती है अर्थात प्रदेश सरकार के आदेश पर ही काम करती है. कर्नाटक में कांग्रेस सरकार है. मुमकिन है कि सत्ता के मद में चूर कांग्रेस ने ही पुलिस को इन बेगुनाह टेक्नीशियन्स पर लाठीचार्ज करने का आदेश दिया हो. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया डूब गई थी,इस बार क्या होता है. फिलहाल तो इस घटना ने कांग्रेस की डूबती नाव में के ही संकेत दिए हैं.

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