जन की बात और लोपक प्रस्तुति – ग्राउंड रिपोर्ट (तामलुक, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल की तामलुक लोकसभा सीट तृणमूल कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक है. यह पूर्व मेदिनीपुर जिले में है. तृणमूल कांग्रेस के दिव्येन्दु अधिकारी इस सीट का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं.

ममता बनर्जी के बाद तृणमूल की राजनीति में जिनका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है उनमें अधिकारी परिवार का नाम सबसे ऊपर आता है. जहाँ पिता शिशिर अधिकारी कांथी लोकसभा सीट से सांसद हैं, वहीं बड़े भाई शुभेंदु अधिकारी तामलुक विधानसभा सीट से विधायक और ममता बनर्जी के सरकार में ताकतवर मंत्री हैं. दबी जुबान में अक्सर ही अधिकारी परिवार के राजनीतिक महत्वकांक्षाओं की चर्चा होती रहती है. ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक उभार से शुभेंदु असहज बताये जाते हैं. शुभेंदु की अपनी महत्वाकांक्षा है, भाजपा नेताओं से गुपचुप मिलने की बातें अक्सर अखबारों में छपती रहती है. लेकिन इनकी राजनीतिक शक्ति का अंदाजा होने के कारण ममता बनर्जी ने अबतक धैर्य बनाये रखा है.

तामलुक लोकसभा सीट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि नन्दीग्राम विधानसभा क्षेत्र इसी लोकसभा के अंतर्गत आता है. नन्दीग्राम आंदोलन की पीठ पर सवार होकर ही ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद का सफर तय किया था. इस आंदोलन को खड़ा करने में भी अधिकारी परिवार ने बड़ी भूमिका निभाई थी.

हाई प्रोफाइल सीट होने के बावजूद तामलुक क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. बेरोजगारी एक बड़ा मसला है. सड़कें टूटी हुई हैं. अल्पसंख्यकों का वोट कई बार निर्णायक रहा है. वाममोर्चा अब भी इस इलाके में कुछ धमक रखता है. जबकि भाजपा तेजी से आगे बढ़ रही है.

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