ममता की चिंता सिर्फ सीबीआई जांच ही नही है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से लेकर गांव-देहातों तक तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हफ्ता वसूली और गुंडागर्दी के आरोप लगते रहे हैं. कोलकाता में रोज वैली और शारदा ही नही बल्कि 2 दर्जन से अधिक चिट फंड कंपनियां जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा लेकर फरार हो गई है. इन्होंने सबसे ज्यादा लूट पश्चिम बंगाल में ही मचाई है. जाहिर है इस बात को लेकर भी उन लोगों में गुस्सा है जो इसके शिकार हुए हैं. लोग मानते हैं कि ऐसा घोटाला सत्ताधारी दल की मदद के बिना सम्भव नही है.
जनता में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ एक गुस्सा जन्म लेता दिख रहा है जिसकी एक झलक बीते शनिवार को प्रधानमंत्री की रैली में भी दिखी. बनगांव में भीड़ इतनी अधिक थी कि प्रधानमंत्री को अपना भाषण छोटा करना पड़ा. दुर्गापुर में भी भीड़ उम्मीद से ज्यादा थी. भाजपा की बढ़ती ताकत ममता बनर्जी के लिए कुछ सालों से चिंता का सबब रहा है. 2016 के विधानसभा चुनावों में महज तीन सीटों पर सिमटने वाली भाजपा आज पश्चिम बंगाल में नम्बर दो पार्टी बन गई है. तमाम सर्वे पश्चिम बंगाल में भाजपा के लोकसभा सीटों की संख्या 10 से अधिक बता रहे हैं.
