छपरा लोकसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद से सारण लोकसभा सीट के नाम से जानी जाती है. सारण (छपरा) लोकसभा सीट कई मायनों में ऐतिहासिक है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले में जेल काट रहे लालू प्रसाद यादव की सियासी पारी 1977 में छपरा लोकसभा सीट से ही शुरू हुई थी.
लालू के लिए यह सीट भावनात्मक और प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा है.शुरू से ही यह सीट राजपूतों और यादवों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र रहा है.
1996 में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के राजीव प्रताप रूडी ने पहली बार लालू यादव के उम्मीदवार लालबाबू राय को शिकस्त दी. 1998 में रूडी हार गए लेकिन 1999 में दुबारा जीत हासिल की.
कहते हैं इस हार को लालू यादव ने दिल पर ले लिया और 2004 के लोकसभा चुनाव में खुद छपरा से उम्मीदवार बने. धांधली की वजह से छपरा सीट पर चुनाव खारिज हो गया और चुनाव आयोग ने दुबारा मतदान का आदेश दे दिया. लेकिन तब तक यूपीए सरकार का गठन हो चुका था और लालू की राह आसान रही. 2009 में लालू दुबारा इस सीट से जीते. लेकिन 2014 में राजीव प्रताप रूडी ने राबड़ी देवी को हराकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया.
भारतीय जनता पार्टी ने आसन्न लोकसभा चुनावों के लिये राजीव प्रताप रूडी को फिर से सारण सीट पर उम्मीदवार बनाया है. लेकिन राजद का उम्मीदवार अभी तक घोषित नही हुआ है. बहुत सम्भव है कि लालू यादव के परिवार से ही कोई इस सीट पर दावेदारी करेगा. हमेशा की तरह सारण का मुकबला इस बार भी करीबी ही रहेगा.
